सरला बिरला विश्वविद्यालय में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का भव्य स्वागत, राजकुमार शुक्ल पर आधारित पुस्तक भेंट
रांची: सरला बिरला विश्वविद्यालय परिसर में गुरुवार को एक विशेष कार्यक्रम के दौरान भारत सरकार के केंद्रीय मंत्री श्री गिरिराज सिंह का भव्य स्वागत किया गया। यह स्वागत राजकुमार शुक्ल फाउंडेशन की ओर से किया गया, जिसमें फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री अजय राय ने पारंपरिक तौर पर उन्हें शाल और पुष्पगुच्छ भेंट कर अभिनंदन किया।
इस गरिमामयी अवसर को और भी विशेष बनाते हुए फाउंडेशन की टीम ने केंद्रीय मंत्री को महान स्वतंत्रता सेनानी राजकुमार शुक्ल पर आधारित एक विस्तृत शोध पुस्तक भी भेंट की। पुस्तक भेंट करने का मुख्य उद्देश्य उन गुमनाम और उपेक्षित स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करना था, जिनका स्वतंत्रता संग्राम में योगदान अमूल्य रहा है लेकिन इतिहास के पन्नों में उन्हें पर्याप्त स्थान नहीं मिला।
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने पुस्तक प्राप्त करते हुए फाउंडेशन के इस ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक प्रयास की खुले दिल से सराहना की। उन्होंने कहा कि “राजकुमार शुक्ल जैसे महान स्वतंत्रता सेनानी, जिन्होंने महात्मा गांधी को चंपारण लाने में निर्णायक भूमिका निभाई, उनके योगदान को आज की पीढ़ी के सामने लाना अत्यंत आवश्यक है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि ऐसे योद्धाओं की स्मृति केवल इतिहास नहीं, बल्कि नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
उन्होंने यह भी कहा कि “देश की स्वतंत्रता केवल कुछ नामों तक सीमित नहीं है। लाखों-करोड़ों लोगों ने अपने तरीके से आज़ादी के आंदोलन में योगदान दिया है और आज वक्त है कि हम उन सभी गुमनाम नायकों को भी उचित सम्मान दें।” केंद्रीय मंत्री ने यह विश्वास जताया कि इस पुस्तक के माध्यम से राजकुमार शुक्ल जैसे नायकों की गाथा देशभर में फैलेगी और लोग उनके बलिदान से प्रेरणा लेंगे।
इस कार्यक्रम में भाजपा के प्रदेश महामंत्री एवं राज्यसभा सांसद डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा का भी विशेष रूप से स्वागत किया गया। उन्हें भी पारंपरिक शाल और पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया गया। उन्होंने भी फाउंडेशन की इस पहल की प्रशंसा की और कहा कि “ऐसे प्रयास इतिहास के अधूरे अध्यायों को पूरा करने का कार्य करते हैं।”
राजकुमार शुक्ल फाउंडेशन, जो वर्षों से स्वतंत्रता सेनानी राजकुमार शुक्ल की स्मृति को पुनर्जीवित करने में सक्रिय है, ने यह भी घोषणा की कि आने वाले समय में स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक मंचों पर राजकुमार शुक्ल की जीवनी और योगदान को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित अतिथियों और विद्यार्थियों ने फाउंडेशन की पुस्तक का अवलोकन किया और इस ऐतिहासिक प्रयास की सराहना की। इस प्रकार यह आयोजन केवल एक सम्मान समारोह न होकर, एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण की पहल बनकर सामने आया।
