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राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में दोषी नहीं बख्शे जाएंगे, कानून-व्यवस्था पर राज्य सरकार विफल : आदित्य साहू

मेदिनीनगर (पलामू)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने कहा कि अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच निष्पक्ष ढंग से चल रही है और जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।

राम मंदिर मामले में जांच जारी, आठ आरोपी गिरफ्तार

रविवार को दो दिवसीय पलामू दौरे के दौरान मेदिनीनगर परिसदन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में आदित्य साहू ने कहा कि उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार इस मामले को लेकर गंभीर है। उन्होंने बताया कि मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है तथा नामजद सभी आठ आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। उन्होंने कहा कि यदि चंपत राय या ट्रस्ट से जुड़ा कोई भी व्यक्ति जांच में दोषी पाया जाता है तो उसे भी कानून के अनुसार सजा मिलेगी।

श्रद्धालुओं की आस्था से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण पार्टी के प्रमुख संकल्पों में शामिल था। ऐसे में श्रद्धालुओं के चढ़ावे से जुड़ी किसी भी वित्तीय अनियमितता को केंद्र या उत्तर प्रदेश सरकार कतई बर्दाश्त नहीं करेगी।

झारखंड की कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल

आदित्य साहू ने झारखंड की कानून-व्यवस्था पर भी राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में नौकरशाही हावी है और अपराध की घटनाओं में लगातार वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर को पलामू में अवैध खनन के खिलाफ आधी रात को स्वयं छापेमारी करनी पड़ी, जो प्रशासनिक व्यवस्था की विफलता का संकेत है।

विनीत तिवारी हत्याकांड का किया उल्लेख

उन्होंने कहा कि हत्या, लूट और दुष्कर्म जैसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। मेदिनीनगर के कारोबारी विनीत तिवारी हत्याकांड का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य आरोपी की अब तक गिरफ्तारी नहीं होना पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। साथ ही चैनपुर के मंटू सिंह के साथ कथित पुलिस मारपीट मामले में भी संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होने की आलोचना की।

‘अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण’ का आरोप

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि राज्य में अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है, जिसके लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जवाबदेह हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य गठन के समय जिन उद्देश्यों को लेकर अलग राज्य की मांग की गई थी, वे 26 वर्ष बाद भी पूरे नहीं हो सके हैं।

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