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शिबू सोरेन के निधन पर देशभर में शोक की लहर, राष्ट्रपति से लेकर राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने जताया दुख


रांची, 5 अगस्त। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक और आदिवासी समुदाय के ऐतिहासिक नेता शिबू सोरेन के निधन ने पूरे देश को शोक में डुबो दिया है। दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में रविवार देर रात उन्होंने अंतिम सांस ली। वह 81 वर्ष के थे और लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे।

उनके निधन की खबर के बाद झारखंड से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक राजनीतिक और सामाजिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन सहित कई प्रमुख नेताओं ने गहरी संवेदना व्यक्त की।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शोक व्यक्त करते हुए कहा,

“शिबू सोरेन जी का निधन सामाजिक न्याय के क्षेत्र में एक बड़ी क्षति है। उन्होंने आदिवासी पहचान और झारखंड राज्य के गठन के लिए संघर्ष किया। उनके जन-कल्याण, विशेषकर आदिवासी समुदायों के लिए किए गए कार्य हमेशा याद किए जाएंगे।”

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ट्वीट कर कहा,

“मैं झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झामुमो संस्थापक शिबू सोरेन जी के निधन से दुखी हूं। उन्होंने झारखंड के जल, जंगल, जमीन और संस्कृति के संरक्षण के लिए आजीवन संघर्ष किया। मैंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बात कर गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं।”

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और विधायक चंपई सोरेन ने भावुक होकर कहा,

“यह एक युग का अंत है। झारखंड आंदोलन के दौरान पहाड़ों और सुदूर गांवों से लेकर विधानसभा तक बिताए पल याद आ रहे हैं। गुरुजी ने महाजनी प्रथा और नशे के खिलाफ जिस जुझारूपन से संघर्ष किया, वह आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा।”

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लिखा,

“आज झारखंड के इतिहास का एक अध्याय समाप्त हो गया है। शिबू सोरेन को मैं भलीभांति जानती थी और उनका अत्यंत सम्मान करती थी। मेरी संवेदनाएं हेमंत सोरेन और उनके परिवार के साथ हैं।”

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा,

“शिबू सोरेन का जीवन वंचितों, आदिवासियों और मजदूरों के हितों को समर्पित था। उनके निधन से सामाजिक न्याय की आवाज कमजोर पड़ी है।”

झारखंड सरकार ने दो दिन का राजकीय शोक घोषित किया है। शिबू सोरेन के पार्थिव शरीर को सोमवार शाम रांची लाया जाएगा, और मंगलवार को गोला प्रखंड स्थित नेमरा गांव में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

गुरुजी के निधन ने झारखंड की राजनीति और सामाजिक चेतना में एक ऐसा शून्य छोड़ दिया है, जिसकी भरपाई संभव नहीं। उनके विचार और संघर्ष की विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी।


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