पद्मिनी एकादशी 27 मई को, भगवान विष्णु की आराधना से मिलती है सुख-समृद्धि : संजय सर्राफ
रांची : विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना गया है। वर्ष भर आने वाली सभी एकादशियों में पुरुषोत्तम अधिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पद्मिनी एकादशी कहा जाता है। इस वर्ष पद्मिनी एकादशी 27 मई, बुधवार को मनाई जाएगी। यह एकादशी अत्यंत दुर्लभ और पुण्यदायी मानी जाती है, क्योंकि यह केवल अधिक मास में ही आती है।
उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना तथा व्रत रखने से व्यक्ति को सुख, समृद्धि, आरोग्य और मोक्ष की प्राप्ति होती है। पौराणिक कथाओं में भी पद्मिनी एकादशी का विशेष उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से मनुष्य के समस्त पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
संजय सर्राफ ने बताया कि इस एकादशी का नाम “पद्मिनी” माता लक्ष्मी के पद्म अर्थात कमल स्वरूप से जुड़ा हुआ माना जाता है। भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए यह व्रत अत्यंत प्रभावकारी माना गया है। धार्मिक दृष्टि से इस दिन श्रद्धालु प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं तथा भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल, पीले पुष्प, धूप, दीप एवं नैवेद्य अर्पित करते हैं।
उन्होंने कहा कि अनेक भक्त निर्जला या फलाहार व्रत रखकर पूरे दिन भजन-कीर्तन एवं विष्णु सहस्रनाम का पाठ करते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन किया गया दान-पुण्य कई गुना फल प्रदान करता है। गरीबों को अन्न, वस्त्र एवं जरूरतमंदों की सहायता करने का भी विशेष महत्व बताया गया है।
संजय सर्राफ ने कहा कि पद्मिनी एकादशी का उद्देश्य केवल उपवास करना नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त करना है। यह व्रत व्यक्ति को भौतिक मोह-माया से ऊपर उठकर ईश्वर भक्ति की ओर प्रेरित करता है। एकादशी का उपवास शरीर और मन दोनों को शुद्ध करने का माध्यम माना गया है, जिससे मानसिक शांति, सकारात्मक सोच एवं आत्मबल में वृद्धि होती है।
उन्होंने कहा कि अधिक मास में आने वाली यह एकादशी साधना और तपस्या के लिए अत्यंत श्रेष्ठ मानी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की आराधना करने से घर में सुख-समृद्धि और वैभव का आगमन होता है। जिन लोगों के जीवन में आर्थिक, मानसिक या पारिवारिक कठिनाइयाँ होती हैं, उनके लिए यह व्रत विशेष फलदायी माना गया है।
अंत में उन्होंने कहा कि पद्मिनी एकादशी हमें धर्म, संयम, सेवा और सदाचार का संदेश देती है। यह पर्व भारतीय संस्कृति की आध्यात्मिक चेतना और धार्मिक परंपराओं को सशक्त बनाने का माध्यम है। श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया यह व्रत जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है।
