मकर संक्रांति 14 या 15 जनवरी? तिथि को लेकर लोगों में दुविधा : एकादशी और गुरुवार बनी वजह
23 वर्षों बाद षट्तिला एकादशी के साथ बना विशेष संयोग
रांची। मकर संक्रांति का पर्व इस वर्ष किस दिन मनाया जाए, इसे लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। बीते कुछ वर्षों से मकर संक्रांति 14 और 15 जनवरी—दोनों तिथियों पर मनाई जा रही है, जिससे भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
14 जनवरी को सूर्य का मकर राशि में प्रवेश
इस वर्ष 14 जनवरी को सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ही षट्तिला एकादशी का संयोग भी बन रहा है। यह विशेष योग 23 वर्षों के बाद बना है। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार, जिस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, उसी दिन मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है।
एकादशी पर खिचड़ी और चावल वर्जित
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के दिन चावल एवं खिचड़ी बनाना, खाना और दान करना धर्मसम्मत नहीं माना जाता। यही कारण है कि 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनाने को लेकर लोगों में संशय बना हुआ है।
ज्योतिषियों की राय: संक्रांति और खिचड़ी पर्व अलग-अलग
कुछ ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि
14 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाए
जबकि 15 जनवरी को खिचड़ी पर्व एवं दान-पुण्य किया जाए
गुरुवार होने से नई उलझन
हालांकि, इस सुझाव के साथ एक और दुविधा सामने आ रही है, क्योंकि 15 जनवरी गुरुवार का दिन है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुरुवार को खिचड़ी का सेवन शुभ नहीं माना जाता। ऐसी मान्यता है कि इससे गुरु ग्रह का प्रतिकूल प्रभाव बढ़ता है और आर्थिक कष्ट आने की संभावना रहती है।
श्रद्धालुओं में असमंजस
इन सभी धार्मिक एवं ज्योतिषीय कारणों के चलते श्रद्धालुओं के बीच यह सवाल बना हुआ है कि मकर संक्रांति एवं खिचड़ी पर्व किस तिथि को मनाना अधिक उचित और धर्मसम्मत होगा।
