टकरा में धूमधाम से मनी जयपाल सिंह मुंडा की 123वीं जयंती, विकास के अधूरे वादे फिर आए सामने
खूंटी : खूंटी जिले के पैतृक गांव टकरा में आज हॉकी के महान खिलाड़ी और खूंटी संसदीय क्षेत्र के पहले सांसद जयपाल सिंह मुंडा की 123वीं जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर गांव में विशेष आयोजन किए गए, जिनमें बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों और खेलप्रेमियों ने भाग लिया।
जयंती कार्यक्रम में सांसद कालीचरण मुंडा, विधायक राम सूर्या मुंडा, पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा और पूर्व विधायक नीलकंठ सिंह मुंडा सहित कई प्रमुख नेता टकरा पहुंचे। सभी ने जयपाल सिंह मुंडा के समाधि स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। इसके साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया और फुटबॉल समेत अन्य खेल प्रतियोगिताएं भी कराई गईं, जिनमें ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।
जयपाल सिंह मुंडा के योगदान को याद करते हुए वक्ताओं ने उन्हें न केवल एक महान खिलाड़ी, बल्कि आदिवासी समाज के सशक्त नेता के रूप में भी स्मरण किया। उल्लेखनीय है कि जयपाल सिंह मुंडा के पैतृक गांव टकरा को वर्ष 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने आदर्श गांव बनाने की घोषणा की थी। हालांकि, दस वर्ष बीत जाने के बाद भी गांव में अपेक्षित विकास नहीं हो पाया है।
गांव में कई बुनियादी सुविधाओं की कमी अब भी बनी हुई है। समाधि स्थल की रंगाई-पुताई पिछले दो वर्षों से नहीं हो सकी है। हालांकि मिनी हॉकी स्टेडियम, पंचायत सचिवालय, अस्पताल भवन, मिनी जिम और सोलर आधारित पेयजल जलमीनार जैसी संरचनाएं बनाई गई हैं, लेकिन हॉकी स्टेडियम की स्थिति ऐसी है कि वहां हॉकी खेलना संभव नहीं है और फिलहाल केवल फुटबॉल का ही उपयोग हो पा रहा है। जयपाल सिंह मुंडा की प्रतिमा गांव के प्रवेश द्वार पर स्थापित की गई है, जो आने-जाने वालों को उनके गौरवशाली इतिहास की याद दिलाती है।
जयपाल सिंह मुंडा के पुत्र जयंत जयपाल सिंह मुंडा ने कहा कि जयंती के अवसर पर हर वर्ष कई घोषणाएं की जाती हैं, लेकिन उनका क्रियान्वयन वर्षों तक नहीं होता। उन्होंने बताया कि गांव में शिक्षा व्यवस्था अब भी कमजोर है और उनका परिवार स्वयं बच्चों को पढ़ाने का कार्य करता है। जयपाल सिंह मुंडा के नाम पर चल रही छात्रवृत्ति योजना भी सीमित संख्या में ही आदिवासी बच्चों को लाभ पहुंचा पा रही है।
गौरतलब है कि जयपाल सिंह मुंडा पांच बार सांसद रहे और 1928 के ओलंपिक खेलों में भारतीय हॉकी टीम को स्वर्ण पदक दिलाने में उनकी कप्तानी की अहम भूमिका रही। वे संविधान सभा के सदस्य भी रहे। ऐसे महान व्यक्तित्व के गांव को आदर्श बनाने का सपना अब भी अधूरा है, और ग्रामीणों को विकास की लंबी राह तय होने का इंतजार है।
