जेपीएससी की पारदर्शिता पर भाजयुमो ने उठाए सवाल, 20 से 22 जुलाई तक चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान

रांची : भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) ने झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए आयोग पर अपारदर्शिता, अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। शनिवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष शशांक राज ने कहा कि जिस आयोग पर राज्य के लाखों युवाओं के भविष्य की जिम्मेदारी है, वही आज पारदर्शिता के गंभीर संकट से जूझ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जेपीएससी रोजगार उपलब्ध कराने वाला आयोग नहीं, बल्कि “रोजगार का व्यापार” करने वाला संस्थान बन गया है।
शशांक राज ने हाल ही में घोषित जेपीएससी परीक्षा परिणामों पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि परिणाम आयोग के सभी सदस्यों के हस्ताक्षर के बिना जारी किए गए। उन्होंने पूछा कि जब आयोग के तीन सदस्यों के हस्ताक्षर ही नहीं थे, तो परिणाम किस नियम और अधिकार के तहत जारी किया गया। उन्होंने पूरी चयन प्रक्रिया की वैधता और पारदर्शिता की जांच कराने की मांग की।
20 से 22 जुलाई तक होगा चरणबद्ध आंदोलन
भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष ने जेपीएससी के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा करते हुए बताया कि 20 जुलाई को पूरे राज्य में सोशल मीडिया अभियान चलाया जाएगा। 21 जुलाई को सभी जिला मुख्यालयों में मशाल जुलूस निकाला जाएगा, जबकि 22 जुलाई को “चलो जेपीएससी घेरते हैं” अभियान के तहत रांची स्थित जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से जेपीएससी कार्यालय तक मार्च निकालकर आयोग का घेराव किया जाएगा। इस दौरान प्रतीकात्मक रूप से “जेपीएससी सफाई अभियान” भी चलाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि भ्रष्ट और अपारदर्शी व्यवस्था के विरोध में है। भाजयुमो राज्य के लाखों प्रतियोगी छात्रों के साथ मजबूती से खड़ा है और उनके अधिकारों की लड़ाई लोकतांत्रिक तरीके से जारी रखेगा।
आरटीआई और उत्तर पुस्तिकाओं को लेकर भी उठाए सवाल
शशांक राज ने कहा कि पूर्व जेपीएससी अध्यक्ष नीलिमा केरकेट्टा के कार्यकाल में सभी आवश्यक हस्ताक्षरों के बिना कभी परीक्षा परिणाम जारी नहीं किए जाते थे। उन्होंने वर्ष 2011-13 के जेपीएससी प्रकरण का उल्लेख करते हुए चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत अभ्यर्थियों को उनकी उत्तर पुस्तिकाओं का अवलोकन नहीं कराया जाता और न ही उनकी प्रतियां सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाती हैं। इसके अलावा आयोग परीक्षा का कट-ऑफ अंक भी सार्वजनिक नहीं करता, जिससे पूरी चयन प्रक्रिया संदेह के घेरे में आ जाती है।
भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि आयोग अक्सर परीक्षा परिणाम देर रात जारी करता है और वर्षों से नियमित परीक्षा कैलेंडर जारी करने में भी विफल रहा है। इससे प्रतियोगी छात्रों को तैयारी और भविष्य की योजना बनाने में कठिनाई होती है।
सरकारी नौकरियों में आयु सीमा बढ़ाने की मांग
शशांक राज ने राज्य सरकार से सरकारी नौकरियों में अधिकतम आयु सीमा बढ़ाने की मांग भी की। उन्होंने कहा कि बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में सरकारी नौकरियों के लिए अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष तक है, जबकि झारखंड के कई अभ्यर्थी कम आयु सीमा के कारण अवसरों से वंचित हो रहे हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जेपीएससी की कार्यप्रणाली को पारदर्शी, जवाबदेह और निष्पक्ष नहीं बनाया गया, तो युवाओं का लोकतांत्रिक आंदोलन और व्यापक होगा। उन्होंने कहा कि भाजयुमो प्रतियोगी छात्रों की आवाज को मजबूती से उठाता रहेगा।
