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डीएमएफटी फंड के दुरुपयोग का लगाया आरोप, सरकार श्वेत पत्र जारी करे : बाबूलाल मरांडी

चाईबासा, 15 जुलाई। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) फंड के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि खदान प्रभावित क्षेत्रों के विकास के उद्देश्य से बनाए गए इस फंड का लाभ जमीनी स्तर पर कहीं दिखाई नहीं देता। उन्होंने सरकार से डीएमएफटी फंड के उपयोग को लेकर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की।

बुधवार को चाईबासा स्थित भाजपा जिला कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में मरांडी ने कहा कि पिछले तीन दिनों के कोल्हान दौरे के दौरान उन्होंने खनन प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने दावा किया कि क्षेत्र में गरीबी, बेरोजगारी और बुनियादी सुविधाओं का अभाव गंभीर चिंता का विषय है और इसके लिए राज्य सरकार जिम्मेदार है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2014 में खदान प्रभावित क्षेत्रों के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाओं के विस्तार के उद्देश्य से डीएमएफटी फंड की व्यवस्था की थी। इसके तहत जिला उपायुक्त को ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाया गया ताकि राशि का पारदर्शी एवं प्रभावी उपयोग सुनिश्चित हो सके। हालांकि, उनके हालिया दौरे में इस योजना का अपेक्षित प्रभाव कहीं दिखाई नहीं दिया।

मरांडी ने दावा किया कि पिछले दस वर्षों में अकेले पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले को डीएमएफटी मद से 3,742.15 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जिनमें से 75.68 प्रतिशत राशि खर्च भी कर दी गई। इसके बावजूद खदान प्रभावित गांवों की मूलभूत समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि फंड का दुरुपयोग हुआ है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि डीएमएफटी से हुए सभी खर्चों का विवरण संबंधित पोर्टल पर सार्वजनिक होना चाहिए था, ताकि आम लोग जान सकें कि राशि किन योजनाओं पर खर्च की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इस दिशा में पारदर्शिता नहीं बरती और पत्रकारों से भी पूरे मामले की जांच करने की अपील की।

खनन क्षेत्र में निवेश और रोजगार के मुद्दे पर मरांडी ने कहा कि देशभर में अब तक 434 खदानों की नीलामी हो चुकी है, जबकि झारखंड में केवल तीन खदानों का ऑक्शन हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की निष्क्रियता के कारण कई खदानें वर्षों से बंद पड़ी हैं, जिससे स्थानीय युवाओं के रोजगार के अवसर प्रभावित हुए हैं और पलायन बढ़ा है।

उन्होंने ओडिशा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 45 कोयला एवं गैर-कोयला खदानों की नीलामी की गई, जिससे राज्य को अधिक राजस्व प्राप्त हुआ। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में झारखंड को खनिज रॉयल्टी के रूप में लगभग 22 हजार करोड़ रुपये मिले, जबकि ओडिशा को करीब 46 हजार करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। उनके अनुसार, यह अंतर प्रभावी खनन नीति और समय पर खदानों की नीलामी का परिणाम है।

मरांडी ने राज्य सरकार के विदेश दौरों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि निवेश आकर्षित करने के नाम पर लगातार विदेश यात्राएं और एमओयू किए जा रहे हैं, लेकिन उनका अपेक्षित परिणाम धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा है।

प्रेसवार्ता में पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, पूर्व सांसद गीता कोड़ा, पूर्व मंत्री बड़कुंवर गगराई, भाजपा के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता जेबी तुबिद, प्रदेश प्रवक्ता मृत्युंजय शर्मा सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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