रांची

Vote Bachao Rally: 1 नवंबर की रैली को लेकर झारखंड कांग्रेस का जनजागरण अभियान तेज, कमलेश बोले- अधिकार नहीं छिनने देंगे

रांची, 27 अक्टूबर। दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को प्रस्तावित ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली को लेकर झारखंड कांग्रेस ने जनजागरण अभियान तेज कर दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने मंगलवार को रांची स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि पार्टी नागरिकों के मताधिकार की रक्षा के लिए आवाज उठाती रहेगी।

कमलेश ने आरोप लगाया कि देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था और नागरिकों के मताधिकार को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी नागरिक को मतदान के अधिकार से वंचित करने की कोशिश को कांग्रेस सफल नहीं होने देगी।

जिलों में चल रहा जनजागरण अभियान

प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि दिल्ली की प्रस्तावित रैली को लेकर झारखंड के सभी जिलों में जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। पार्टी के जिला प्रभारी, वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता आम लोगों से संवाद कर रहे हैं और मतदाता सूची तथा मतदान के अधिकार से जुड़े मुद्दों को लेकर लोगों को जानकारी दे रहे हैं।

कमलेश ने दावा किया कि बिहार और पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में लोगों के मताधिकार से वंचित होने का मुद्दा सामने आया है। कांग्रेस इन मुद्दों को दिल्ली की रैली में उठाने की तैयारी कर रही है। हालिया पार्टी कार्यक्रमों में भी झारखंड से कार्यकर्ताओं की भागीदारी की तैयारी की जानकारी दी गई है।

निर्वाचन आयोग को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल

कमलेश ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग का इस्तेमाल भाजपा के राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। हालांकि, ये कांग्रेस नेताओं द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर अपना विरोध जारी रखेगी।

प्रदीप यादव ने SIR और मतदाता सूची का मुद्दा उठाया

प्रेस वार्ता में कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए जिम्मेदार संस्थाओं की प्रक्रियाओं के कारण ही मताधिकार सीमित होने की आशंका पैदा हो रही है।

उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से उठाए गए ‘वोट चोरी’ के आरोपों का भी उल्लेख किया और निर्वाचन आयोग की SIR प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए।

हालांकि, SIR और फॉर्म-6 को लेकर निर्वाचन आयोग ने हाल में सुप्रीम कोर्ट में अलग पक्ष रखा है। आयोग ने 26 अक्टूबर को दाखिल हलफनामे में कहा कि SIR से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए और फॉर्म-6 में कोई संशोधन नहीं किया गया है। आयोग के अनुसार SIR के तहत इस्तेमाल किया गया घोषणा-पत्र अलग दस्तावेज है।

महाराष्ट्र की मतदाता संख्या का भी उठाया मुद्दा

प्रदीप यादव ने महाराष्ट्र की मतदाता सूची में बदलाव का मुद्दा उठाते हुए दावा किया कि वर्ष 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच करीब छह महीने की अवधि में मतदाताओं की संख्या में लगभग 39 लाख का अंतर सामने आया था। उन्होंने निर्वाचन आयोग से इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

उन्होंने फॉर्म-6 को लेकर भी सवाल उठाए और दावा किया कि आयोग के दस्तावेजों में फॉर्म की लंबाई को लेकर अंतर दिखाई देता है। दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि वैधानिक फॉर्म-6 में बदलाव नहीं किया गया है।

निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी आपत्ति

प्रदीप यादव ने निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया में हुए बदलाव पर भी कांग्रेस की आपत्ति सामने रखी। उन्होंने कहा कि पहले नियुक्ति समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल थे, जबकि मौजूदा व्यवस्था में मुख्य न्यायाधीश की जगह केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को शामिल किया गया है।

कांग्रेस नेता ने इस बदलाव को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता एवं निष्पक्षता को लेकर उठने वाले सवालों का समाधान जरूरी है।

प्रेस वार्ता में ये नेता रहे मौजूद

प्रेस वार्ता में कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा, सोनाल शांति, उज्ज्वल तिवारी, अख्तर अली और राजन वर्मा सहित पार्टी के अन्य नेता मौजूद रहे।

कांग्रेस ने 1 नवंबर को दिल्ली में होने वाली रैली के जरिए मतदाता सूची, SIR और मताधिकार से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की तैयारी की है। वहीं निर्वाचन आयोग इन मुद्दों पर अपने हालिया न्यायालयीन पक्ष में SIR के फैसलों और फॉर्म-6 को लेकर अलग स्थिति स्पष्ट कर चुका है।

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