हजारीबाग भूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट से विनय कुमार सिंह को जमानत, अदालत ने जमानत शर्तों के उल्लंघन पर दी कार्रवाई की छूट

Ranchi: हजारीबाग वन भूमि मामले से जुड़े प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने कारोबारी विनय कुमार सिंह को जमानत देने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, विनय कुमार सिंह और उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह इस मामले में आरोपी हैं।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि आरोपी प्रभावशाली है और रिहाई के बाद गवाहों या मामले से जुड़े लोगों को प्रभावित कर सकता है। वहीं बचाव पक्ष की ओर से आरोपी की लंबे समय से हिरासत में रहने सहित अन्य दलीलें रखी गईं।
सभी पक्षों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने विनय कुमार सिंह को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निचली अदालत द्वारा निर्धारित जमानत की शर्तों का उल्लंघन होता है, तो राज्य सरकार जमानत रद्द कराने के लिए न्यायालय का रुख कर सकती है।
हजारीबाग वन भूमि मामले में क्या हैं आरोप?
मामला हजारीबाग में कथित तौर पर वन भूमि के अवैध म्यूटेशन और उससे जुड़े लेनदेन से संबंधित है। जांच एजेंसी के अनुसार, मामले में सरकारी भूमि के रिकॉर्ड में कथित हेरफेर कर निजी व्यक्तियों के पक्ष में भूमि हस्तांतरण का आरोप है। इस मामले में पूर्व हजारीबाग उपायुक्त एवं निलंबित आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे भी आरोपी हैं। झारखंड हाईकोर्ट ने अप्रैल 2026 में चौबे की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
जांच के दौरान यह आरोप भी सामने आया कि वन भूमि के रिकॉर्ड में बदलाव कर उसका म्यूटेशन निजी व्यक्तियों के पक्ष में कराया गया। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी ने चौबे की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे और गवाहों को प्रभावित किए जाने की आशंका जताई थी।
विनय सिंह और स्निग्धा सिंह भी आरोपी
हजारीबाग भूमि मामले में विनय कुमार सिंह और उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह के नाम भी सामने आए हैं। सुप्रीम कोर्ट इससे पहले विनय सिंह को अन्य मामलों में भी राहत दे चुका है। फरवरी 2026 में शीर्ष अदालत ने विनय सिंह को कई मामलों में नियमित जमानत दी थी और उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह के खिलाफ तत्काल कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया था।
मामले की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई जांच एजेंसी तथा संबंधित न्यायालय के निर्देशों के अनुसार होगी।
