सेल की चिड़िया-दुबिल माइंस में ग्रामीणों का आंदोलन, उत्पादन और लौह अयस्क ढुलाई ठप
पश्चिमी सिंहभूम। पश्चिमी सिंहभूम जिले के मनोहरपुर स्थित स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल) की चिड़िया-दुबिल माइंस में शुक्रवार को ग्राम सभा दुबिल के नेतृत्व में ग्रामीणों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू कर दिया। सुबह करीब आठ बजे से सैकड़ों ग्रामीणों ने खदान में उत्पादन कार्य और लौह अयस्क की ढुलाई पूरी तरह रोक दी। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि मांगें पूरी होने तक उनका प्रदर्शन जारी रहेगा।
जमीन, सरना स्थल और प्रदूषण को लेकर नाराजगी
ग्रामीणों का आरोप है कि माइंस विस्तार के दौरान सरना स्थल, कब्रिस्तान और रैयती जमीन पर अवैध रूप से पिलर गाड़ दिए गए हैं, जिससे उनकी धार्मिक आस्था और भूमि अधिकार प्रभावित हुए हैं। उनका कहना है कि खदान से निकलने वाले लाल पानी और धूल के कारण खेती प्रभावित हो रही है, जलस्रोत प्रदूषित हो गए हैं और क्षेत्र में पेयजल संकट गहरा गया है।
स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की मांग
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे दुलाल आइड ने कहा कि गांव की जमीन से सेल करोड़ों रुपये का लौह अयस्क निकाल रही है, लेकिन स्थानीय लोगों को इसका लाभ नहीं मिल रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय युवाओं की अनदेखी कर बाहरी लोगों को रोजगार दिया जा रहा है, जबकि प्रभावित गांवों में बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है।
ग्रामीणों ने रखीं प्रमुख मांगें
ग्रामीणों ने स्थानीय 200 युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार देने, अधिग्रहित जमीन का उचित मुआवजा देने, सरना स्थल और कब्रिस्तान से लगाए गए पिलरों को हटाने, गांव में चापाकल और जलमीनार की व्यवस्था करने तथा खनन से हो रहे प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करने की मांग की है। इसके साथ ही प्रभावित ग्रामीणों के लिए मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी मांग उठाई गई है।
सेल प्रबंधन की प्रतिक्रिया का इंतजार
आंदोलन के कारण चिड़िया-दुबिल माइंस में उत्पादन और लौह अयस्क की ढुलाई पूरी तरह प्रभावित रही। समाचार लिखे जाने तक सेल प्रबंधन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
