पूर्वी सिहंभूमि

डिमना लेक हादसे का दुखद अंत, रेस्क्यू अभियान में दो जूनियर डॉक्टरों के शव बरामद

जमशेदपुर, 24 जुलाई। पूर्वी सिंहभूम जिले के बोड़ाम थाना क्षेत्र स्थित डिमना लेक में शुक्रवार तड़के हुए दर्दनाक हादसे का दुखद अंत हो गया। कई घंटों तक चले सघन रेस्क्यू अभियान के बाद महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के दो जूनियर डॉक्टरों सक्षम सिंह और समीर के शव झील से बरामद कर लिए गए। इस घटना से एमजीएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल परिसर में शोक की लहर दौड़ गई है।

जानकारी के अनुसार, एमजीएम मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टर समीर, सक्षम सिंह और यश गुरुवार रात नाइट ड्यूटी पूरी करने के बाद शुक्रवार तड़के डिमना लेक घूमने पहुंचे थे। बताया जाता है कि वे झील के उस हिस्से तक पहुंच गए, जहां आम लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित है। इसी दौरान एक डॉक्टर का मोबाइल फोन पानी में गिर गया। मोबाइल निकालने के प्रयास में तीनों गहरे पानी में उतर गए और पानी की गहराई का अनुमान नहीं लगा सके।

हादसे के दौरान यश किसी तरह तैरकर बाहर निकलने में सफल रहे, जबकि समीर और सक्षम सिंह गहरे पानी में डूब गए। यश ने तत्काल बोड़ाम थाना पुलिस और एमजीएम मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस, प्रशासन, स्थानीय गोताखोरों और राहत-बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर सर्च ऑपरेशन शुरू किया।

कई घंटों की मशक्कत के बाद सबसे पहले सक्षम सिंह का शव बरामद किया गया। इसके कुछ समय बाद गोताखोरों ने समीर का शव भी झील से बाहर निकाल लिया। दोनों शव मिलने के बाद रेस्क्यू अभियान समाप्त कर दिया गया।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सक्षम सिंह पलामू जिले के डाल्टनगंज के निवासी थे, जबकि समीर जमशेदपुर के काशीडीह क्षेत्र के रहने वाले थे। वहीं, हादसे में बचने वाले यश सोनारी के निवासी बताए जा रहे हैं। तीनों एमजीएम मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टर के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे थे।

घटना की सूचना मिलते ही एमजीएम अस्पताल के डॉक्टर, जूनियर चिकित्सक, मेडिकल छात्र, कर्मचारी तथा दोनों डॉक्टरों के परिजन बड़ी संख्या में डिमना लेक पहुंचे। अपने साथियों की असामयिक मौत से अस्पताल परिसर में गहरा शोक व्याप्त है।

पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश कैसे हुआ और घटना के समय वहां सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति क्या थी।

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