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नेमरा में दिशोम गुरु शिबू सोरेन के पारंपरिक श्राद्ध कर्म का आयोजन, मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने किया तीन कर्म का निर्वहन


नेमरा (रामगढ़) : झारखंड आंदोलन के प्रणेता, आदिवासी चेतना के अग्रदूत, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिशोम गुरु शिबू सोरेन के पारंपरिक श्राद्ध कर्म का आयोजन बुधवार को उनके पैतृक गांव नेमरा (रामगढ़) स्थित आवास पर भावपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने अपने परिजनों के साथ पारंपरिक “तीन कर्म” की विधियों का श्रद्धापूर्वक निर्वहन किया। झारखंड की आदिवासी और सरना परंपरा में “तीन कर्म” एक विशेष सामाजिक और सांस्कृतिक अनुष्ठान है, जो दिवंगत आत्मा की शांति, आभार और स्मरण के लिए किया जाता है।

मुख्यमंत्री श्री सोरेन ने इस मौके पर भावुक होते हुए कहा,
“दिशोम गुरु न केवल हमारे परिवार के स्तंभ थे, बल्कि वे झारखंड के असंख्य लोगों के जीवन में प्रकाशपुंज की तरह थे। उन्होंने आदिवासी समाज को आवाज दी, संघर्ष का मार्ग दिखाया और हमें हमारी जड़ों से जोड़ कर रखा।”

श्राद्ध कर्म में राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए हजारों श्रद्धालुओं, सामाजिक प्रतिनिधियों, ग्रामीणों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं, वरिष्ठ नेताओं और आंदोलनकारियों ने भाग लिया। दिशोम गुरु को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए सभी ने सामूहिक रूप से पारंपरिक रीति-रिवाजों के तहत आयोजन में भागीदारी निभाई।

पूरे आयोजन के दौरान सामाजिक एकता, सांस्कृतिक गरिमा और परंपरा के संरक्षण की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी। पारंपरिक बुजुर्गों और गांव के धर्माचार्यों के मार्गदर्शन में कर्मकांड सम्पन्न हुआ। जलकुंड, पिंडदान और विशेष भोज की व्यवस्थाएं की गईं। आमजन के लिए सामूहिक भोज (प्रसाद) का आयोजन भी किया गया, जिसमें हजारों लोगों ने भाग लिया।

कार्यक्रम में झारखंड सरकार के कई मंत्रीगण, जनप्रतिनिधि, अधिकारी, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि एवं आदिवासी समुदाय के वरिष्ठ सदस्य मौजूद रहे। सभी ने दिशोम गुरु के जीवन संघर्ष और उनके योगदान को याद किया और मुख्यमंत्री एवं उनके परिवार के प्रति अपनी संवेदना भी प्रकट की।

दिशोम गुरु की स्मृति में यह आयोजन सिर्फ एक पारंपरिक कर्मकांड नहीं, बल्कि झारखंड की आत्मा को नमन करने का प्रतीक बन गया। उनका संघर्ष, जीवन दर्शन और आदिवासी समाज के लिए उनका समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।



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