रांची

कांके, धुर्वा व गेतलसुद डैम अतिक्रमण मामला गंभीर : झारखंड हाईकोर्ट ने रांची डीसी से मांगा विस्तृत जवाब

रांची। झारखंड उच्च न्यायालय ने कांके, धुर्वा और गेतलसुद डैम में हुए अतिक्रमण के मामले को गंभीरता से लेते हुए रांची के उपायुक्त (डीसी) से विस्तृत जवाब तलब किया है। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति महेश शरतचंद्र सोनाक एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने की।

न्यायालय ने रांची डीसी से यह स्पष्ट करने को कहा है कि तीनों डैमों के लिए कुल कितनी भूमि अधिग्रहित की गई थी, वर्तमान में कितनी भूमि पर अतिक्रमण है और अब तक अतिक्रमण हटाने के लिए क्या-क्या कार्रवाई की गई है। अदालत ने यह भी पूछा है कि क्या इन डैमों के लिए पूर्व में कोई सर्वे कराया गया था या नहीं।

हाईकोर्ट ने इन सभी बिंदुओं पर शपथ पत्र के माध्यम से विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश रांची डीसी को दिया है। इसके साथ ही रांची नगर निगम को भी पिछली सुनवाई में दिए गए आदेशों के अनुपालन से संबंधित रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया है। नगर निगम की ओर से अधिवक्ता एलसीएन शाहदेव ने पक्ष रखा। मामले की अगली सुनवाई 26 मार्च को निर्धारित की गई है।

इससे पूर्व सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता शाहबाज अख्तर ने अदालत को बताया कि हिनू, हरमू नदी और धुर्वा डैम के किनारे से अतिक्रमण हटाने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि कुछ स्थानों पर न्यायालय से प्राप्त स्थगन आदेशों के कारण कार्रवाई बाधित हुई है। साथ ही यह भी बताया गया कि जिला स्कूल के पास स्थित ओवरहेड वाटर टैंक की मरम्मत के लिए नया टेंडर जारी किया गया है।

वहीं, एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने अदालत को अवगत कराया कि धुर्वा डैम के किनारे अतिक्रमण कर आवासीय निर्माण, भूमि की रसीद काटने और नक्शा स्वीकृति से जुड़े मामलों में दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। इन मामलों में एसीबी ने भी अलग से एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी इंद्रजीत सिन्हा ने बताया कि तीनों डैमों के कैचमेंट एरिया में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण किया गया है। उन्होंने कहा कि सबसे गंभीर स्थिति कांके डैम की है, जहां डैम की भूमि पर व्यापक कब्जा है।

उल्लेखनीय है कि बुधवार को हाईकोर्ट में राज्य के जल स्रोतों और नदियों को अतिक्रमण मुक्त करने तथा बड़ा तालाब की सफाई से जुड़ी कई जनहित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हुई।

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