रांची सदर अस्पताल में मरीज की मौत पर बवाल, बाबूलाल मरांडी ने उठाए गंभीर सवाल
रांची, 22 नवंबर । राजधानी रांची के सदर अस्पताल में डॉक्टर की अनुपस्थिति के दौरान लगाए गए इंजेक्शन के बाद एक मरीज की मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना ने सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और रांची के सिविल सर्जन से तुरंत जांच कराने की मांग की है।
मरांडी ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि झारखंड के सरकारी अस्पतालों में लापरवाही चिंता का विषय बन चुकी है। उन्होंने कहा कि जब राज्य की राजधानी के सबसे बड़े अस्पताल में ही डॉक्टर मौजूद नहीं रहते, तो दूरदराज के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों की स्थिति का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।
उन्होंने सिविल सर्जन से पूछा कि डॉक्टर की गैरमौजूदगी में कौन मरीज को इंजेक्शन लगाने का आदेश दे रहा था? और मरीज की हालत बिगड़ने पर इमरजेंसी में कोई डॉक्टर मौजूद क्यों नहीं था?
मरांडी ने स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों और कर्मचारियों से अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने की अपील करते हुए आरोप लगाया कि “नकारे और निकम्मे स्वास्थ्य मंत्री” के कारण लोग अपनी जिम्मेदारियों से दूर न हों, क्योंकि उनकी तत्परता कई जिंदगियों को बचा सकती है।
चाईबासा में थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने की घटना को लेकर भी उन्होंने राज्य सरकार पर निशाना साधा और कहा कि झारखंड में “गूंगी-बहरी, भ्रष्ट और बेशर्म सरकार” सत्ता में है। मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री तक जनता के पैसे रील और होर्डिंग्स पर खर्च कर रहे हैं, जबकि अस्पतालों की दयनीय हालत किसी से छिपी नहीं है।
उन्होंने दावा किया कि सरकारी अस्पतालों में बेड, स्ट्रेचर, उपकरण, दवाइयों और एम्बुलेंस तक की भारी कमी है। कई बार तो मरीजों के परिजन खुद सलाइन पकड़ने को मजबूर रहते हैं।
मरांडी ने आरोप लगाया कि “मुख्यमंत्री से लेकर छोटे कर्मचारी तक केवल कमीशनखोरी में लगे हुए हैं”, और झामुमो-कांग्रेस की सरकार ने राज्य को “खोखला और बदहाल” कर दिया है।
