रांची

रांची: हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका खारिज कर लगाया 12 लाख रुपये जुर्माना, तथ्य छिपाने पर कड़ी टिप्पणी

रांची, 31 जुलाई। झारखंड हाईकोर्ट ने महादेव उरांव की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिका खारिज कर दी। अदालत ने रिट याचिका में पूर्व में पारित एकल पीठ के आदेश को भी वापस ले लिया। न्यायालय ने पाया कि याचिकाकर्ता ने महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर अदालत को गुमराह किया। इस मामले में अदालत ने याचिकाकर्ता पर 12 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

न्यायमूर्ति राजेश शंकर की अदालत ने अपने आदेश में कहा कि रिट याचिका की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने प्रतिवादियों से प्राप्त करीब एक करोड़ रुपये की राशि से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं की। इसके अलावा जिन लोगों के अधिकार और हित मामले से सीधे प्रभावित थे, उन्हें याचिका में प्रतिवादी नहीं बनाया गया।

अदालत ने इन तथ्यों को गंभीरता से लेते हुए पहले पारित उस आदेश को वापस ले लिया, जिसमें रातू रोड स्थित मधुकम क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने के लिए अंचल अधिकारी को कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था।

शपथ पत्र में गलत तथ्य देने का आरोप

न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता ने शपथ पत्र में गलत और भ्रामक तथ्य प्रस्तुत किए। साथ ही हस्तक्षेपकर्ताओं के साथ हुए धन के लेनदेन की जानकारी भी छिपाई गई। अदालत ने इस पूरे मामले को न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग की श्रेणी में माना और 12 लाख रुपये का आर्थिक दंड लगाया।

अदालत के आदेश के अनुसार जुर्माने की राशि मामले से जुड़े 12 प्रतिवादियों को एक-एक लाख रुपये के रूप में दी जाएगी। मामले में हस्तक्षेपकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सचिन कुमार और अधिवक्ता गौरव राज ने न्यायालय के समक्ष पक्ष रखा।

मुंडारी प्रकृति की जमीन से जुड़ा है मामला

मामला खादगड़ा शिव-दुर्गा मंदिर रोड स्थित मुंडारी प्रकृति की जमीन से जुड़ा है। जिला प्रशासन ने इस भूमि पर बने 12 मकानों को अतिक्रमण मानते हुए उन्हें ध्वस्त करने का आदेश दिया था। इसके बाद बुलडोजर से कार्रवाई शुरू की गई, जिसका स्थानीय निवासियों ने विरोध किया।

स्थानीय लोगों का कहना था कि उन्होंने जमीन 5.25 लाख रुपये प्रति कट्ठा की दर से खरीदकर वर्षों पहले मकान बनाए थे और लंबे समय से वहां रह रहे हैं। उनका दावा है कि 38.25 डिसमिल जमीन के लिए उन्होंने कुल करीब 1 करोड़ 8 लाख 93 हजार 750 रुपये का भुगतान किया था।

अदालत की टिप्पणी से याचिकाकर्ता को झटका

हाईकोर्ट के ताजा फैसले के बाद याचिकाकर्ता को राहत नहीं मिली। अदालत ने महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने और न्यायालय को गुमराह करने को गंभीरता से लेते हुए न केवल पूर्व आदेश वापस लिया, बल्कि 12 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।

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