सदर अस्पताल में जन आरोग्य समिति सदस्यों का उन्मुखीकरण कार्यक्रम शुरू, 21 जनवरी तक चलेगा प्रशिक्षण

रांची। सदर अस्पताल परिसर में 19 जनवरी से 21 जनवरी 2026 तक जन आरोग्य समिति (JAS) के सदस्यों के लिए उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में सोमवार, 19 जनवरी को एक दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य समिति के सदस्यों को उनके दायित्व, कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य सेवाओं में जनभागीदारी की भूमिका से अवगत कराना रहा।
कार्यक्रम में राज्य स्तर से राज्य नोडल पदाधिकारी (टीबी एवं CPHC कोषांग) डॉ. कमलेश कुमार, राज्य कार्यक्रम समन्वयक अकाय मिंज, जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. एस. बास्की, जिला कार्यक्रम प्रबंधक प्रवीण कुमार सिंह, जिला कार्यक्रम समन्वयक (साहिया) प्रीति चौधरी, जिला कार्यक्रम समन्वयक (टीबी) राकेश राय, क्षेत्रीय समन्वयक श्वेता वर्मा, संपा रॉय (TRIF) सहित विभिन्न प्रखंडों के मुखिया, सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए जिला कार्यक्रम समन्वयक प्रीति चौधरी ने बताया कि प्रत्येक आयुष्मान आरोग्य मंदिर में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जन आरोग्य समिति का गठन किया गया है। समिति के अध्यक्ष मुखिया होते हैं, जबकि सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी, सहिया, महिला ग्राम संगठन की सदस्याएं एवं अन्य ग्रामीण प्रतिनिधि इसके सदस्य होते हैं।
राज्य कार्यक्रम समन्वयक अकाय मिंज ने जन आरोग्य समिति की संरचना, उद्देश्य, कार्यक्षेत्र, वित्तीय प्रबंधन और समुदाय में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सहिया स्वास्थ्य विभाग और गांव के बीच सेतु के रूप में कार्य करती है और लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में अहम भूमिका निभाती है।
राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ. कमलेश कुमार ने कहा कि टीबी मुक्त पंचायत अभियान का उद्देश्य केवल बीमारी का इलाज नहीं, बल्कि टीबी से जुड़े भय, भ्रांतियों और सामाजिक भेदभाव को समाप्त करना भी है। उन्होंने बताया कि देश में प्रतिवर्ष लगभग 28–29 लाख टीबी मरीज सामने आते हैं, जबकि करीब 4 लाख लोगों की मृत्यु टीबी के कारण होती है। हालांकि झारखंड में टीबी से मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। उन्होंने जानकारी दी कि रांची जिले की 14 पंचायतों को टीबी मुक्त पंचायत घोषित किया जा चुका है।
डॉ. कमलेश कुमार ने टीबी के लक्षणों की जानकारी देते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक खांसी, बुखार, वजन घटना, रात में पसीना आना या सांस लेने में परेशानी हो, तो तुरंत जांच करानी चाहिए। टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत इलाजरत मरीजों को निक्षय पोषण योजना के अंतर्गत 1000 रुपये प्रतिमाह की सहायता डीबीटी के माध्यम से दी जाती है।
इस अवसर पर मुखिया अध्यक्ष सोमा उरांव ने कहा कि स्वास्थ्य योजनाओं को प्रभावी रूप से धरातल पर उतारने के लिए मुखिया और सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी है। कार्यक्रम के दौरान स्वच्छता, पोषण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, रोग निवारण तथा सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विस्तृत चर्चा की गई।
