रांची

रांची में जन आरोग्य समिति सदस्यों का उन्मुखीकरण कार्यक्रम

स्वास्थ्य सेवाओं में जनभागीदारी को मिलेगी मजबूती

रांची, 19 जनवरी । राजधानी रांची स्थित सदर अस्पताल परिसर के सभागार में सोमवार को जन आरोग्य समिति (जेएएस) के सदस्यों के लिए उन्मुखीकरण (ओरिएंटेशन) कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य समिति के सदस्यों को उनके दायित्वों, कार्यप्रणाली तथा स्वास्थ्य सेवाओं में जनभागीदारी की भूमिका से अवगत कराना था।

कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए जिला कार्यक्रम समन्वयक प्रीति चौधरी ने बताया कि प्रत्येक आयुष्मान आरोग्य मंदिर में सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जन आरोग्य समिति का गठन किया गया है। समिति के अध्यक्ष ग्राम पंचायत के मुखिया होते हैं, जबकि इसके सदस्यों में सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी, सहिया, महिला ग्राम संगठन की महिलाएं तथा अन्य ग्रामीण प्रतिनिधि शामिल होते हैं।

इस मौके पर राज्य कार्यक्रम समन्वयक अकाय मिंज ने स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने जन आरोग्य समिति की संरचना, उद्देश्य, कार्यक्षेत्र, स्वास्थ्य योजनाओं की निगरानी, वित्तीय प्रबंधन तथा समुदाय में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।

स्वास्थ्य विभाग और गांव के बीच सेतु है सहिया

कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि जन आरोग्य समिति स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सहिया स्वास्थ्य विभाग और गांव के बीच एक मजबूत सेतु के रूप में कार्य करती है, जिसके माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचती है तथा जरूरतमंदों को स्वास्थ्य केंद्रों तक लाने में सहायता मिलती है।

देश में हर वर्ष चार लाख लोगों की मौत टीबी से: डॉ. कमलेश

राज्य नोडल पदाधिकारी (टीबी एवं सीपीएचसी कोषांग) डॉ. कमलेश कुमार ने कहा कि टीबी मुक्त पंचायत का लक्ष्य केवल बीमारी का इलाज नहीं, बल्कि समाज से टीबी को लेकर भय, भ्रांतियों और भेदभाव को समाप्त करना भी है। उन्होंने बताया कि टीबी मुक्त भारत अभियान 1962 से पूरे देश में संचालित है और वर्तमान में देश में 28–29 लाख टीबी मरीज हैं।

उन्होंने बताया कि हर वर्ष देश में लगभग चार लाख लोगों की मौत टीबी के कारण होती है, हालांकि झारखंड में टीबी से होने वाली मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है। टीबी केवल दवा और जांच से ही नहीं, बल्कि जनभागीदारी, बेहतर पोषण, स्वच्छ जीवनशैली और गुणवत्तापूर्ण खानपान से समाप्त की जा सकती है।

डॉ. कमलेश ने बताया कि यह बीमारी विशेष रूप से किसान, मजदूर, स्लम क्षेत्रों और निर्माण स्थलों पर कार्य करने वाले लोगों में अधिक पाई जाती है। पंचायत स्तर पर व्यापक जांच आवश्यक है। यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक खांसी, बुखार, भूख न लगना, रात में पसीना आना, वजन घटना, थकान या सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत जांच करानी चाहिए।

14 पंचायतें टीबी मुक्त घोषित

उल्लेखनीय है कि रांची जिले की 14 पंचायतों को टीबी मुक्त पंचायत घोषित किया गया है। यह उपलब्धि स्वास्थ्य विभाग, पंचायत प्रतिनिधियों, सहिया, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और समुदाय के सक्रिय सहयोग से संभव हो सकी है। टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत ‘निक्षय मित्र’ बनकर इलाजरत टीबी मरीजों को अतिरिक्त पोषण सहायता दी जा रही है। सभी पंजीकृत टीबी मरीजों को प्रति माह 1000 रुपये डीबीटी के माध्यम से निक्षय पोषण सहायता राशि उपलब्ध कराई जाती है।

कार्यक्रम में राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ. कमलेश कुमार, राज्य कार्यक्रम समन्वयक अकाय मिंज, जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. एस. बास्की, जिला कार्यक्रम प्रबंधक प्रवीण कुमार सिंह, जिला कार्यक्रम समन्वयक (सहिया) प्रीति चौधरी, जिला कार्यक्रम समन्वयक (टीबी) राकेश राय सहित विभिन्न प्रखंडों के मुखिया और सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

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