रांची

27 हजार एकड़ में अफीम की खेती का खुलासा, विधानसभा में उठा पुलिस-अपराधी गठजोड़ का सवाल

झारखंड

Ranchi : झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के नौवें दिन सोमवार को सदन में अफीम की अवैध खेती, मादक पदार्थों की तस्करी और नक्सली गतिविधियों को लेकर गंभीर चर्चा हुई। कई विधायकों ने सरकार से इन मुद्दों पर जवाब मांगा और स्थिति को चिंताजनक बताया।

अफीम की खेती पर विधायक हेमलाल मुर्मू का सवाल

विधायक हेमलाल मुर्मू ने राज्य में बढ़ती अफीम की खेती और मादक पदार्थों की तस्करी को लेकर सरकार से कड़ा सवाल पूछा। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि इसमें पुलिस और अपराधियों के संभावित गठजोड़ की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने सदन को बताया कि वर्ष 2024-25 में 27,015 एकड़ भूमि पर अफीम की खेती को नष्ट किया गया। यह आंकड़ा अपने आप में गंभीर स्थिति की ओर इशारा करता है। उनका कहना था कि इतने बड़े पैमाने पर खेती होना प्रशासन के लिए चिंता का विषय है और इसकी गहराई से जांच जरूरी है।

मंत्री योगेंद्र प्रसाद का जवाब

विधायक के सवाल का जवाब देते हुए मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि सरकार इस मामले को लेकर पूरी तरह सतर्क है। जैसे ही कहीं अफीम की खेती या मादक पदार्थों की तस्करी की सूचना मिलती है, प्रशासन तुरंत कार्रवाई करता है। उन्होंने कहा कि अगर जांच में कोई बड़ा अधिकारी भी इसमें शामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार किसी भी दोषी को बख्शने के पक्ष में नहीं है।

नक्सली गतिविधियों पर भी उठा सवाल

सदन में नक्सली गतिविधियों का मुद्दा भी उठा। विधायक सरयू राय ने सरकार से पूछा कि जब सरकार कहती है कि नक्सली अब केवल सीमित क्षेत्रों में रह गए हैं, तो वे क्षेत्र कौन-कौन से हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सारंडा क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों में बढ़ोतरी की खबरें क्यों आ रही हैं और इसके पीछे क्या कारण हैं।

सरकार ने क्या कहा

मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने जवाब देते हुए कहा कि राज्य में नक्सलियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। इन अभियानों का असर भी दिख रहा है और नक्सली गतिविधियां पहले की तुलना में काफी कम हुई हैं। उन्होंने बताया कि पहले की तुलना में अब नक्सलियों की संख्या केवल 10 से 20 प्रतिशत ही रह गई है। सरकार की सरेंडर पॉलिसी भी इस दिशा में काफी कारगर साबित हुई है, जिसके कारण कई उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया है।

प्रशासनिक सेवा नियमावली में संशोधन की मांग

इस दौरान विधायक निरल पूर्ति ने झारखंड प्रशासनिक सेवा की नियमावली में संशोधन का मुद्दा उठाया। उन्होंने अधिकारियों के वेतनमान और पदों के वर्गीकरण को लेकर सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा। इस पर वित्त मंत्री ने जवाब देते हुए बताया कि विशेष सचिव रैंक के अधिकारियों को लेवल-14 का वेतनमान दिया जाएगा। इसके अनुरूप संबंधित पदों को भी उसी श्रेणी में रखा गया है। सदन में इन मुद्दों पर हुई चर्चा के दौरान कई सदस्यों ने राज्य में कानून-व्यवस्था, नक्सलवाद और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर अपनी-अपनी चिंताएं भी जाहिर कीं। सरकार ने आश्वासन दिया कि सभी मामलों में जरूरी कदम उठाए जाएंगे और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *