राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस पर राज्यपाल संतोष गंगवार ने कहा – “हस्तकरघा हमारी संस्कृति और परंपरा का जीवंत प्रतीक”
डोरंडा कॉलेज, रांची में बुनकरों को किया गया सम्मानित, ‘हैंडलूम फॉर होम’ को बनाया जाए दिनचर्या का हिस्सा
रांची, 07 अगस्त । झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि हस्तकरघा केवल एक कला नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कृति और परंपरा का जीवंत प्रतीक है। हर धागा, हर बुनाई हमारी लोक-कथाओं और रीति-रिवाजों की अनूठी कहानी कहती है।
राज्यपाल गुरुवार को रांची के डोरंडा महाविद्यालय में आयोजित 12वें राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। यह आयोजन विवर्स डेवलपमेंट एंड रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (WDRO) और बुनकर प्रकोष्ठ की ओर से किया गया था।
राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि उन लाखों बुनकर परिवारों को सम्मान देने का माध्यम है, जो आत्मनिर्भर भारत की नींव को मजबूती दे रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘हैंडलूम फॉर होम’ अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे देश में स्वदेशी वस्त्रों के प्रति सम्मान की भावना और मजबूत हुई है।
उन्होंने अपने केंद्रीय वस्त्र मंत्री के कार्यकाल के अनुभव साझा करते हुए कहा कि देशभर के बुनकरों की समस्याओं को नजदीक से समझने और उनके समाधान के लिए कौशल विकास, तकनीकी सहायता और बाज़ार उपलब्धता जैसी योजनाएं शुरू की गईं।
राज्यपाल ने झारखंड की तसर रेशम और कत्था कढ़ाई जैसी परंपरागत हस्तकरघा कलाओं की सराहना करते हुए कहा कि इनकी अंतरराष्ट्रीय पहचान है। उन्होंने हाल में बनी फिल्मों “संगठन से सफलता” और “फैशन के लिए खादी” का भी उल्लेख किया, जो हथकरघा उद्योग के सामाजिक और आर्थिक महत्व को उजागर करती हैं।
इस अवसर पर राज्यपाल ने कई बुनकरों को सम्मानित किया और WDRO की पहल की सराहना करते हुए उम्मीद जताई कि यह मंच नवाचारियों और युवा उद्यमियों को जोड़ने में सफल रहेगा। उन्होंने कहा कि “हैंडलूम फॉर होम” को केवल नारा नहीं, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा बनाना चाहिए, यही हमारे बुनकरों के श्रम का सच्चा सम्मान होगा।
कार्यक्रम की शुरुआत में राज्यपाल ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि उनकी सादगी, संघर्ष और जनजातीय समाज के प्रति समर्पण को हमेशा याद किया जाएगा।
