रांची

नेतरहाट स्कूल मामले में झारखंड हाईकोर्ट सख्त, प्रशासनिक अधिकारी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना

झारखंड हाईकोर्ट

Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने नेतरहाट आवासीय विद्यालय के गिरते शैक्षणिक स्तर और उसके गौरवशाली इतिहास को पुनर्जीवित करने से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सख्त रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस एम. एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले में दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए प्रशासनिक अधिकारी की कार्रवाई पर नाराजगी जताई।

प्रशासनिक अधिकारी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना
कोर्ट ने नेतरहाट विद्यालय के प्रशासनिक अधिकारी रोशन कुमार बख्शी की ओर से दायर आईए (इंटरलोक्यूटरी एप्लिकेशन) को खारिज कर दिया। साथ ही उन पर 25 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है। कोर्ट ने आदेश दिया कि यह राशि उन्हें स्वयं अपने खर्च से भरनी होगी और 10 दिनों के भीतर इसे बरियातू स्थित ब्रजकिशोर नेत्रहीन बालिका विद्यालय में जमा करना होगा।

कोर्ट के आदेशों में बाधा पर सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि कोर्ट के आदेशों को लागू होने से रोकने का प्रयास किया जा रहा है। कोर्ट ने यह भी कहा कि एडहॉक कमेटी की बैठक को जानबूझकर टालने की कोशिश की जा रही है। खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि तकनीकी कारणों का बहाना बनाकर कोर्ट के आदेशों को रोकना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

नई नियुक्ति और बैठक का निर्देश
अस्थायी कार्यकारिणी समिति के वर्तमान सभापति अशोक कुमार सिन्हा के अस्वस्थ होने के कारण कोर्ट ने बड़ा फैसला लिया। कोर्ट ने सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी और नेतरहाट विद्यालय के पूर्व छात्र राजकुमार को नया सभापति नियुक्त किया है। इसके साथ ही 2 मई को सुबह 11 बजे एडहॉक कमेटी की बैठक आयोजित करने का निर्देश भी दिया गया है।

जनहित याचिका पर चल रही सुनवाई
यह मामला प्रार्थी केदारनाथ लाल दास द्वारा दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिका में नेतरहाट आवासीय विद्यालय के पुराने गौरवशाली शैक्षणिक स्तर को फिर से बहाल करने की मांग की गई है।

नेतरहाट स्कूल के भविष्य पर नजर
कोर्ट की सख्ती के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि नेतरहाट आवासीय विद्यालय के प्रशासनिक ढांचे और शैक्षणिक स्तर में सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। यह मामला राज्य में शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर भी अहम माना जा रहा है।

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