Jharkhand High Court: वन विभाग में कर्मचारियों की कमी मामले में हाईकोर्ट सख्त, JPSC अध्यक्ष-सदस्यों की नियुक्ति पर मांगी समय-सीमा
रांची, 03 सितंबर: झारखंड हाईकोर्ट ने वन विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी से जुड़े स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति को लेकर स्पष्ट जानकारी मांगी है। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने सरकार को 10 सितंबर तक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने की समय-सीमा बताने का निर्देश दिया है।
JPSC में नियुक्तियों को लेकर हाईकोर्ट का सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार से पूछा कि JPSC में अध्यक्ष और सदस्यों के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया कब तक पूरी की जाएगी। कोर्ट ने सरकार को अगली सुनवाई तक इस संबंध में स्पष्ट और ठोस समय-सीमा बताने को कहा है।
इस मामले की पिछली सुनवाई में भी हाईकोर्ट ने JPSC के अध्यक्ष का पद लंबे समय से रिक्त रहने पर नाराजगी जताई थी। अदालत ने कहा था कि JPSC एक संवैधानिक संस्था है और इसके अध्यक्ष का पद लंबे समय तक खाली नहीं रखा जा सकता।
वन विभाग की परीक्षाओं पर भी जानकारी
सुनवाई के दौरान JPSC की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल और प्रिंस कुमार ने अदालत को बताया कि असिस्टेंट कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट (ACF) और रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर (RFO) के पदों के लिए चल रही परीक्षा प्रक्रिया को सरकार की ओर से रद्द कर दिया गया है।
परीक्षा प्रक्रिया रद्द किए जाने की जानकारी के बाद इन पदों पर नियुक्ति की आगे की प्रक्रिया को लेकर भी स्थिति स्पष्ट होना जरूरी हो गया है।
वन विभाग में रिक्त पदों से जुड़ा है मामला
यह स्वत: संज्ञान मामला वन विभाग में अधिकारियों और कर्मियों की कमी से संबंधित है। विभाग में विभिन्न पदों पर नियुक्ति के लिए JPSC की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। ऐसे में आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति का मुद्दा इस मामले की सुनवाई के दौरान अहम हो गया है।
हाईकोर्ट ने सरकार से कहा है कि वह JPSC में नियुक्तियों को लेकर ठोस समय-सीमा के साथ अपना पक्ष स्पष्ट करे।
10 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
अदालत ने राज्य सरकार को 10 सितंबर तक JPSC के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर जानकारी देने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई भी 10 सितंबर को होगी।
