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झारखंड उच्च न्यायालय ने की नगर निगम में असिस्टेंट लॉ ऑफिसर के पद पर प्रमोशन की मांग वाली अपील खारिज

रांची, 26 जून । झारखंड उच्च न्यायालय ने रांची नगर निगम में असिस्टेंट लॉ ऑफिसर पद पर पदोन्नति की मांग से जुड़ी एक महत्वपूर्ण अपील को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि केवल लीगल सेक्शन में लंबे समय तक कार्य करने से कोई कर्मचारी लीगल कैडर का सदस्य नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि लीगल कैडर में नियमों के अनुरूप नियुक्ति या समावेशन के बिना पदोन्नति का दावा स्वीकार्य नहीं है।

मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने अरुण कुमार की ओर से दायर लेटर्स पेटेंट अपील (एलपीए) को खारिज करते हुए एकल पीठ के पूर्व आदेश को बरकरार रखा।

खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि असिस्टेंट लॉ ऑफिसर का पद लीगल असिस्टेंट का प्रोन्नति पद है। ऐसे में केवल वही कर्मचारी इस पद पर पदोन्नति के पात्र हो सकते हैं, जिनकी नियुक्ति या समावेशन विधिवत लीगल असिस्टेंट के रूप में हुआ हो। अदालत ने कहा कि अपीलकर्ता मूल रूप से सामान्य प्रशासनिक कैडर में नियुक्त थे, इसलिए उन्हें सीधे असिस्टेंट लॉ ऑफिसर के पद पर पदोन्नत करना सेवा नियमों के विपरीत होगा।

अदालत ने यह भी कहा कि यदि अपीलकर्ता को लीगल असिस्टेंट मान लिया जाता है तो उन अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित होंगे, जिनके लिए सेवा नियमों में लीगल असिस्टेंट का पद प्रत्यक्ष भर्ती के माध्यम से भरे जाने का प्रावधान है।

सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि वह वर्षों से नगर निगम के लीगल सेक्शन में कार्यरत हैं। नगर निगम ने भी विभिन्न पत्रों में उन्हें लीगल असिस्टेंट बताते हुए उनकी पदोन्नति का प्रस्ताव सरकार को भेजा था। इसलिए उन्हें लीगल असिस्टेंट मानते हुए असिस्टेंट लॉ ऑफिसर पद पर पदोन्नति दी जानी चाहिए।

वहीं, रांची नगर निगम की ओर से अधिवक्ता वंदना सिंह ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि अपीलकर्ता की मूल नियुक्ति सामान्य प्रशासनिक कैडर में हुई थी और उन्होंने लीगल कैडर में नियमानुसार प्रवेश प्राप्त नहीं किया है। ऐसे में उन्हें प्रोन्नति का लाभ नहीं दिया जा सकता।

मामले के अनुसार, अरुण कुमार की नियुक्ति वर्ष 1996 में अनुकंपा के आधार पर क्लास-III कर्मचारी के रूप में हुई थी। बाद में उन्हें नगर निगम के लीगल सेक्शन में सहायक के रूप में पदस्थापित किया गया। वर्ष 2017 में संशोधित सेवा नियम लागू होने के बाद पहली बार अलग लीगल कैडर का गठन किया गया, जिसमें लीगल असिस्टेंट को प्रवेश स्तर का पद, असिस्टेंट लॉ ऑफिसर को प्रथम प्रोन्नति पद तथा लॉ ऑफिसर को द्वितीय प्रोन्नति पद के रूप में निर्धारित किया गया।

उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि सेवा नियमों के निर्धारित प्रावधानों से हटकर किसी कर्मचारी को केवल कार्य के आधार पर लीगल कैडर का सदस्य नहीं माना जा सकता। इसलिए अपीलकर्ता की पदोन्नति संबंधी मांग स्वीकार करने का कोई कानूनी आधार नहीं बनता।

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