Jharkhand DGP Appointment Case: डीजीपी नियुक्ति विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में कल सुनवाई, UPSC ने दाखिल की लिखित दलील
चयन और नियुक्ति नियमावली-2025 की वैधता पर उठे सवाल, डीजीपी तदाशा मिश्रा की नियुक्ति पर भी पड़ सकता है असर
रांची: झारखंड के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति से जुड़े विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई होगी। यह मामला चर्चित प्रकाश सिंह प्रकरण से जुड़ा है। पिछली सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने झारखंड सरकार की ओर से पुलिस अधिनियम, 1861 के तहत बनाई गई चयन एवं नियुक्ति नियमावली-2025 के कुछ प्रावधानों पर सवाल उठाए थे। अब इस मामले में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने भी अपनी लिखित दलीलें अदालत में दाखिल कर दी हैं।
विवादित नियमों के तहत ऐसे अधिकारियों को भी डीजीपी पद के लिए पात्र माना गया है, जिनकी सेवानिवृत्ति में छह महीने से कम समय बचा हो। इसके लिए पूर्वव्यापी सेवा का लाभ दिए जाने का प्रावधान भी चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रथम दृष्टया इन प्रावधानों को प्रकाश सिंह मामले में तय दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं माना है।
डीजीपी तदाशा मिश्रा की नियुक्ति पर भी असर की आशंका
इस मामले का असर झारखंड की मौजूदा डीजीपी तदाशा मिश्रा की नियुक्ति पर भी पड़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है।
अदालत ने झारखंड सरकार को विकल्प दिया है कि वह विवादित नियम की समीक्षा करे या फिर इस संबंध में अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करे। मामले की कानूनी जटिलता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन को एमिकस क्यूरी यानी न्याय मित्र के रूप में सहायता करने का अनुरोध किया है।
यूपीएससी ने 26 अक्टूबर को दाखिल की दलीलें
सुप्रीम कोर्ट ने न्याय मित्र से अन्य राज्यों में डीजीपी की नियुक्ति के लिए बनाए गए समान कानूनों और नियमों की भी समीक्षा करने को कहा है। इस काम में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को उनकी सहायता करने का निर्देश दिया गया है।
यूपीएससी की ओर से 26 अक्टूबर 2026 को लिखित दलीलें दाखिल की जा चुकी हैं। अब मंगलवार को होने वाली सुनवाई में अदालत नियमावली की वैधता और डीजीपी नियुक्ति से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर आगे विचार कर सकती है।
