Jharkhand Politics: SIR और मतदाता सूची को लेकर कांग्रेस का आंदोलन, 28 सितंबर को निर्वाचन आयोग कार्यालय के बाहर प्रदर्शन
रांची: विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और मतदाता सूची को लेकर झारखंड कांग्रेस ने आंदोलन का ऐलान किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि 28 सितंबर को राज्य के सभी जिलों में निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ प्रदर्शन किया जाएगा। रांची में धुर्वा स्थित मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के बाहर भी कांग्रेस कार्यकर्ता प्रदर्शन करेंगे।
प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में केशव महतो कमलेश ने कहा कि पार्टी निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर है। उन्होंने बताया कि आंदोलन की तैयारियों को लेकर प्रदेश प्रभारी के. राजू ने जिला अध्यक्षों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए चर्चा की है।
SIR को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल
केशव महतो कमलेश ने आरोप लगाया कि SIR के जरिए मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। कांग्रेस का दावा है कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं।
उन्होंने निर्वाचन आयोग की जवाबदेही और प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की। कांग्रेस नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि SIR की प्रक्रिया का असर बड़ी संख्या में मतदाताओं पर पड़ सकता है। ये कांग्रेस नेताओं के आरोप हैं; इन्हें निर्वाचन आयोग के निष्कर्ष के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।
निर्वाचन आयोग की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, झारखंड समेत कई राज्यों में SIR-2026 की प्रक्रिया निर्धारित कार्यक्रम के तहत चल रही है। आयोग के कार्यक्रम में झारखंड के लिए 20 सितंबर 2026 को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित करने और 20 सितंबर से 20 अक्टूबर तक दावे एवं आपत्तियां दर्ज करने की अवधि निर्धारित है।
धुर्वा स्थित निर्वाचन कार्यालय के बाहर प्रदर्शन
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के मुताबिक, 28 सितंबर को धुर्वा स्थित मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया जाएगा। पार्टी की ओर से केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग के खिलाफ राजनीतिक विरोध दर्ज कराने की बात कही गई है।
कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची में पात्र नागरिकों के नाम सुरक्षित रहना चाहिए और नाम जोड़ने, हटाने तथा सुधार की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।
प्रदीप यादव ने मताधिकार को लेकर उठाए सवाल
कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने भी SIR और मतदाता सूची की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाताओं के नाम सूची से हटाने की प्रक्रिया से उनके मताधिकार पर असर पड़ सकता है।
उन्होंने दावा किया कि इसका प्रभाव अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक समुदायों के मतदाताओं पर पड़ने की आशंका है। यह भी कांग्रेस नेता का आरोप है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि इस खबर में नहीं हुई है।
Form-6 और दस्तावेजों को लेकर कांग्रेस की आपत्ति
प्रदीप यादव ने नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए Form-6 की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि नए मतदाताओं से माता-पिता से संबंधित जानकारी मांगी जा रही है और SIR के दौरान कई दस्तावेजों को लेकर अतिरिक्त प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
वहीं, निर्वाचन आयोग के मतदाता सेवा पोर्टल पर नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए Form-6 की सुविधा उपलब्ध है। आयोग के पोर्टल के अनुसार 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के पात्र नागरिक Form-6 के जरिए नए मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं।
11 दस्तावेजों को लेकर भी कांग्रेस ने उठाया मुद्दा
कांग्रेस नेता ने SIR प्रक्रिया के दौरान मांगे जा रहे दस्तावेजों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि 11 तरह के दस्तावेजों में मैट्रिक प्रमाणपत्र को भी शामिल किया गया है और इसके सत्यापन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
हालांकि, इस संबंध में दस्तावेजों की अनिवार्यता और किस चरण में कौन-सा दस्तावेज मांगा जाता है, यह संबंधित निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देश और मतदाता की स्थिति पर निर्भर करता है। निर्वाचन आयोग के आधिकारिक SIR निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि Enumeration Phase में मतदाताओं से दस्तावेज एकत्र नहीं किए जाने हैं और आवश्यकता होने पर ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद नोटिस की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
BJP के पत्र पर कार्रवाई का आरोप
प्रदीप यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा की ओर से भेजे गए पत्र के बाद राज्य के निर्वाचन पदाधिकारी की ओर से मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पत्र भेजा गया। उन्होंने जातीय, आवासीय और EWS प्रमाणपत्रों की ऑफलाइन प्रक्रिया से जुड़े कथित पत्राचार का भी मुद्दा उठाया।
इन दावों पर संबंधित निर्वाचन अधिकारियों या भाजपा का पक्ष इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।
SIR को लेकर देशभर में राजनीतिक बहस
SIR को लेकर देश के विभिन्न राज्यों में राजनीतिक दलों के बीच बहस जारी है। कांग्रेस मतदाता सूची की प्रक्रिया में पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने की मांग कर रही है, जबकि निर्वाचन आयोग अपनी निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची के पुनरीक्षण का काम कर रहा है।
झारखंड में SIR-2026 के तहत मतदाता सूची से संबंधित दावे और आपत्तियां 20 अक्टूबर 2026 तक दर्ज की जा सकती हैं। आयोग के आधिकारिक पोर्टल पर मतदाता अपनी जानकारी और SIR से संबंधित सेवाओं को देख सकते हैं।
