झारखंड विधानसभा: विधायकों की अनुपस्थिति पर अध्यक्ष की सख्त नाराजगी, कहा— ‘सवाल सूचीबद्ध हैं तो सदन में मौजूद रहें’
रांची: झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन सोमवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो ने सदस्यों की गैरमौजूदगी पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विधायक प्रश्न डालते हैं, लेकिन जब उनके सवालों का नंबर आता है तो वे सदन में अनुपस्थित रहते हैं। इससे सदन की गरिमा और कार्यवाही दोनों प्रभावित होती हैं।
सदन में दिखा असमंजस, देर से पहुंचे विधायकों के सवाल छूटे
अध्यक्ष जब सदस्यों का नाम पुकारकर उपस्थिति दर्ज करा रहे थे, तभी विधायक अरूप चटर्जी का नाम पुकारे जाने पर उन्हें अनुपस्थित बताया गया। हालांकि अरूप चटर्जी ने तुरंत खड़े होकर कहा कि वे सदन में ही मौजूद हैं, जिससे कुछ देर के लिए स्थिति असहज हो गई।
वहीं, देर से पहुंचे विधायक प्रदीप यादव और जयराम महतो के सवालों का नंबर पहले ही निकल चुका था। दोनों सदस्यों ने अपना सवाल लेने का अनुरोध किया, लेकिन स्पीकर ने नियमों का हवाला देते हुए इसे खारिज कर दिया और कार्यवाही को आगे बढ़ा दिया।
शुरुआत में भाजपा का कोई विधायक नहीं था मौजूद
सोमवार को सदन की कार्यवाही सुबह 11:06 बजे शुरू हुई। कार्यवाही के शुरुआती समय में मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का एक भी विधायक सदन में उपस्थित नहीं था, जो दिनभर चर्चा का विषय बना रहा।
सदन में गूंजीं सीएम हेमंत सोरेन के जन्मदिन की शुभकामनाएं
प्रश्नकाल के बीच वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सदन को सूचित किया कि सोमवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का जन्मदिन है। इसके बाद सत्तारूढ़ दल के विधायकों ने मेज थपथपाकर और बधाई देकर मुख्यमंत्री को शुभकामनाएं दीं, जिससे सदन का माहौल कुछ देर के लिए खुशनुमा हो गया।
पशुपालकों की योजनाओं पर बिक्सल कोंगाड़ी का सवाल, सरकार ने दिया जवाब
प्रश्नकाल के दौरान कोलेबिरा विधायक बिक्सल कोंगाड़ी ने राज्य में पशुपालकों को मिल रहे सरकारी लाभों को लेकर सवाल उठाया।
सरकार की ओर से दिए गए उत्तर के मुख्य बिंदु:
- बजट में विस्तार: पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के बजट में लगातार बढ़ोतरी की जा रही है ताकि ज्यादा से ज्यादा किसानों को जोड़ा जा सके।
- पशुपालन योजना बोर्ड: पहली बार राज्य में पशुपालन योजना बोर्ड की शुरुआत की गई है, जिससे पशुपालकों को संस्थागत सहयोग मिल सके।
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर जोर: सरकार ने माना कि पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, इसलिए आने वाले समय में इसके लिए बजट और योजनाओं का और विस्तार किया जाएगा।
