20 जुलाई को मनाया जाएगा अंतर्राष्ट्रीय चंद्रमा दिवस, विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान के प्रति जागरूकता बढ़ाने का अवसर : संजय सर्राफ
रांची : हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष एवं झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय चंद्रमा दिवस प्रत्येक वर्ष 20 जुलाई को मनाया जाता है। यह दिन वर्ष 1969 में मानव इतिहास की उस ऐतिहासिक उपलब्धि की स्मृति में मनाया जाता है, जब अपोलो-11 मिशन के तहत अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग और बज़ एल्ड्रिन ने पहली बार चंद्रमा की सतह पर कदम रखा था। यह उपलब्धि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और मानव साहस की ऐतिहासिक विजय का प्रतीक मानी जाती है।
संजय सर्राफ ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय चंद्रमा दिवस का उद्देश्य चंद्रमा के वैज्ञानिक अध्ययन, उसके शांतिपूर्ण उपयोग तथा अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देना है। साथ ही यह दिवस विद्यार्थियों और युवाओं में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग एवं गणित (STEM) के प्रति रुचि विकसित करने का भी महत्वपूर्ण माध्यम है।
उन्होंने कहा कि चंद्रमा पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह है, जिसका पृथ्वी के पर्यावरण और जीवन पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। समुद्र में ज्वार-भाटा, पृथ्वी की धुरी की स्थिरता तथा अनेक प्राकृतिक प्रक्रियाएं चंद्रमा से प्रभावित होती हैं। प्राचीन काल से ही चंद्रमा मानव सभ्यता, संस्कृति, साहित्य, कला और धार्मिक परंपराओं का अभिन्न हिस्सा रहा है। आधुनिक विज्ञान की दृष्टि से चंद्रमा भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों, अनुसंधान केंद्रों और अन्य ग्रहों की यात्राओं के लिए महत्वपूर्ण आधार बनता जा रहा है।
संजय सर्राफ ने कहा कि भारत के लिए यह दिवस विशेष महत्व रखता है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने चंद्रयान-1, चंद्रयान-2 और चंद्रयान-3 जैसे सफल अभियानों के माध्यम से अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में विश्वभर में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि चंद्रयान-3 की सफलता ने भारत को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट सफल सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला पहला देश बनाकर भारतीय वैज्ञानिकों की प्रतिभा का लोहा पूरी दुनिया से मनवाया।
उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय चंद्रमा दिवस का संदेश है कि अंतरिक्ष किसी एक देश की संपत्ति नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता की साझा धरोहर है। चंद्रमा का उपयोग केवल शांतिपूर्ण, वैज्ञानिक और मानव कल्याण के उद्देश्यों के लिए होना चाहिए। यह दिवस विज्ञान के प्रति जिज्ञासा, नवाचार, वैश्विक सहयोग और सतत विकास की भावना को मजबूत करने की प्रेरणा देता है।
संजय सर्राफ ने कहा कि नई पीढ़ी को बड़े सपने देखने, वैज्ञानिक सोच विकसित करने और अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करने के लिए प्रेरित करना समय की आवश्यकता है। मानवता के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में चंद्रमा आज भी आशा, अनुसंधान और असीम संभावनाओं का प्रतीक बना हुआ है।
