रांची

स्वतंत्रता दिवस राष्ट्रीय गर्व और कर्तव्यबोध का पर्व है: संजय सर्राफ



रांची। अंतरराष्ट्रीय हिंदी साहित्य भारती, रांची के उपाध्यक्ष एवं झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के प्रांतीय संयुक्त महामंत्री संजय सर्राफ ने कहा है कि स्वतंत्रता दिवस केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि गौरव, श्रद्धा और जिम्मेदारी का प्रतीक है। 15 अगस्त को हम न केवल ब्रिटिश शासन से मिली मुक्ति का स्मरण करते हैं, बल्कि भारत की संप्रभुता, आत्मनिर्भरता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराते हैं।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष हम 79वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं, जो हमें गौरवशाली अतीत की याद दिलाते हुए, सशक्त भविष्य की दिशा में प्रेरित करता है।
“15 अगस्त 1947” को भारत ने लगभग **दो शताब्दियों की गुलामी के बाद आजादी प्राप्त की थी। यह स्वतंत्रता महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, रानी लक्ष्मीबाई जैसे अनगिनत वीरों के बलिदान और संघर्ष का परिणाम है।

राष्ट्रीय एकता और चेतना का पर्व

संजय सर्राफ ने कहा कि 15 अगस्त को पूरे देश में राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है, राष्ट्रगान गाया जाता है और देशभक्ति से ओत-प्रोत सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
दिल्ली के लाल किले से प्रधानमंत्री का संबोधन इस दिन का प्रमुख आकर्षण होता है, जिसमें देश की वर्तमान उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं का विवरण प्रस्तुत किया जाता है।

भारत की वैश्विक प्रगति पर प्रकाश

उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में भारत ने डिजिटल इंडिया, आत्मनिर्भर भारत अभियान, चंद्रयान-3 और गगनयान जैसे कार्यक्रमों के जरिए अभूतपूर्व उपलब्धियाँ हासिल की हैं। इसके साथ ही हरित ऊर्जा की दिशा में पहल और वैश्विक मंच पर सशक्त उपस्थिति ने भारत की छवि को और अधिक मजबूत किया है।
देशभक्ति कर्म में झलकनी चाहिए

संजय सर्राफ ने कहा कि, “स्वतंत्रता केवल अधिकार नहीं, बल्कि कर्तव्य भी है।” हर नागरिक का दायित्व है कि वह कानून का पालन, पर्यावरण की रक्षा, शिक्षा का प्रसार, और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाए।
उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे देशभक्ति को केवल नारों तक सीमित न रखें, बल्कि उसे अपने कर्मों और योगदान के माध्यम से साकार करें।

बलिदान की विरासत, मेहनत से संवरता भविष्य

अंत में उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि यह एक संकल्प का अवसर है—देश को और बेहतर बनाने, और अपनी जिम्मेदारियों को निभाने का।
“2025 का यह स्वतंत्रता दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि आज की स्वतंत्रता, कल के बलिदानों की देन है, और भविष्य की उन्नति, आज की मेहनत पर निर्भर है।”



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