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ममता के प्रचार में हेमंत-कल्पना मैदान में, दमदार भाषण और रैली कर आदिवासी बेल्ट में फूंकी जान

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए सियासी तापमान अपने चरम पर है। इसी बीच, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और गांडेय विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन ने राज्य के आदिवासी बहुल इलाकों में धुआंधार प्रचार कर चुनावी समीकरणों को रोचक बना दिया है। 18 से 20 अप्रैल तक चले तीन दिवसीय सघन प्रचार अभियान में सोरेन दंपति ने पुरुलिया, बांकुरा, पश्चिम मेदिनीपुर और झाड़ग्राम में टीएमसी उम्मीदवारों के लिए वोट मांगे।

आदिवासी वोट बैंक पर ‘सोरेन प्रभाव’
सोरेन दंपति का यह दौरा पूरी तरह से उन आदिवासी बहुल सीटों पर केंद्रित रहा, जहाँ उनकी लोकप्रियता और आदिवासी पहचान निर्णायक भूमिका निभा सकती है। अपनी रैलियों के दौरान, कल्पना सोरेन का अंदाज बेहद आक्रामक और भावुक रहा। उन्होंने जनसभाओं को संबोधित करते हुए हाथों के जोरदार इशारों और तीखे तर्कों से जनता को भाजपा के खिलाफ लामबंद किया।

वहीं, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी मंच साझा करते हुए टीएमसी प्रत्याशियों, जैसे केशियारी से रामजीबन मरडी और मनबाजार से संध्या रानी टुडू के लिए भारी जनसमर्थन की अपील की। सोरेन ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी जेएमएम टीएमसी के साथ मिलकर ‘फिरकापरस्त ताकतों’ अर्थात बीजेपी को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है

‘इंडिया’ ब्लॉक में नया समीकरण!
वहीं राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सोरेन दंपति की यह सक्रियता ‘इंडिया’ (INDIA) ब्लॉक के भीतर एक नए तालमेल की ओर इशारा करती है। यह गठबंधन कांग्रेस की भूमिका से इतर, सीधे तृणमूल कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा के बीच के मजबूत सहयोग को दर्शाता है। ममता बनर्जी की पार्टी को झारखंड सीमा से लगे इलाकों में मजबूत करने के लिए सोरेन दंपति की यह एंट्री काफी सोची-समझी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

चुनावी माहौल हुआ गर्म
सोरेन दंपति के लगातार तीन दिनों के प्रवास ने झाड़ग्राम और आसपास के इलाकों में चुनावी माहौल को गरमा दिया है। भाजपा के गढ़ माने जाने वाले इन क्षेत्रों में सोरेन का पहुंचना टीएमसी के लिए एक बड़ा ‘बूस्टर डोज’ साबित हो सकता है।

विश्लेषकों के अनुसार, यदि आदिवासी बहुल ये क्षेत्र टीएमसी के पक्ष में जाते हैं, तो हेमंत-कल्पना की यह जोड़ी बंगाल की सियासत में ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभाती हुई नजर आ सकती है। चुनाव से पहले सोरेन दंपति का यह आक्रामक रुख विपक्षी खेमे में निश्चित रूप से हलचल बढ़ा रहा है।

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