राज्यपाल गंगवार के कार्यकाल के दो वर्ष पूरे, बोले- झारखंड की सेवा का अनुभव आत्मीय और अविस्मरणीय
रांची, 31 जुलाई। झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि राज्य की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक संपदा, गौरवशाली विरासत और यहां के सरल एवं परिश्रमी लोगों के बीच कार्य करना उनके सार्वजनिक जीवन का अत्यंत महत्वपूर्ण और अविस्मरणीय अनुभव रहा है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल का पद केवल संवैधानिक दायित्व नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और आकांक्षाओं से जुड़ी बड़ी जिम्मेदारी भी है।
राज्यपाल के रूप में अपने दो वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के अवसर पर शुक्रवार को राजभवन स्थित लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, शिक्षाविदों और गणमान्य लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में झारखंड की सेवा का अवसर उनके सार्वजनिक जीवन का नया और महत्वपूर्ण अध्याय रहा। उन्होंने संविधान की मर्यादाओं का पालन करते हुए पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने का प्रयास किया।
गंगवार ने कहा कि कार्यकाल के दौरान राज्य के विकास, शिक्षा, युवाओं, किसानों, महिलाओं तथा वंचित और कमजोर वर्गों से जुड़े विषयों को प्राथमिकता दी। उन्होंने धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा, सिदो-कान्हू, फूलो-झानो, नीलांबर-पीतांबर, ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव सहित राज्य के सभी अमर सेनानियों और महान विभूतियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके आदर्श आज भी समाज और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा देते हैं।
उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में राज्य के विभिन्न जिलों, ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों का दौरा कर समाज के विभिन्न वर्गों से सीधे संवाद का अवसर मिला। केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण की सराहना करते हुए कहा कि झारखंड के समग्र विकास के लिए अभी सामूहिक प्रयासों की जरूरत है।
लोक भवन को संवाद का मंच बनाने का प्रयास
राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने लोक भवन को केवल संवैधानिक और प्रशासनिक संस्था तक सीमित रखने के बजाय जनता के साथ संवाद, विश्वास और सहभागिता के प्रभावी मंच के रूप में विकसित करने का प्रयास किया। शिक्षाविदों, किसानों, युवाओं, सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों और विभिन्न वर्गों के लोगों के साथ नियमित संवाद जारी रहा। आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान के लिए लोक भवन के द्वार हमेशा खुले रखे गए।
विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में अपनी भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने, विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य और बेहतर शैक्षणिक वातावरण के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया गया। उन्होंने कुलपतियों और शिक्षकों से झारखंड को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय उत्कृष्टता का केंद्र बनाने के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया।
‘विकसित भारत-2047’ में झारखंड की महत्वपूर्ण भूमिका
गंगवार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश ‘विकसित भारत-2047’ के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है। प्राकृतिक संसाधनों, जनजातीय विरासत और युवा शक्ति से समृद्ध झारखंड इस राष्ट्रीय विकास यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने सरकार, शैक्षणिक संस्थानों, उद्योग जगत, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से इस लक्ष्य को साकार करने में सक्रिय भागीदारी की अपील की।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव डॉ. नितिन कुलकर्णी ने कहा कि राज्यपाल का सार्वजनिक जीवन सादगी, जनसुलभता, संवादशीलता और संवेदनशीलता का उदाहरण रहा है। उन्होंने शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, विश्वविद्यालयों के सुदृढ़ीकरण और समाज के विभिन्न वर्गों के साथ संवाद को प्राथमिकता दी।
रांची विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सरोज शर्मा ने राज्यपाल की सक्रियता और विश्वविद्यालयों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को प्रेरणादायी बताया। वहीं, झारखंड खुला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) अभय कुमार सिंह ने कहा कि राज्यपाल के मार्गदर्शन में उच्च शिक्षा को नई दिशा मिली है तथा गुणवत्ता, अनुसंधान, नवाचार और शैक्षणिक संस्थानों के सुदृढ़ीकरण पर विशेष जोर दिया गया है।
