फर्जी जन्म प्रमाण पत्र रैकेट का खुलासा, मेराल में ऑनलाइन सेंटर सील

Garhwa : गढ़वा जिले के मेराल प्रखंड स्थित पचफेड़ी गांव में संचालित “विशाल ऑनलाइन सेंटर” में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने के बड़े खेल का प्रशासन ने पर्दाफाश किया है। रविवार को एसडीएम ने औचक छापेमारी कर केंद्र को सील करा दिया। कार्रवाई के दौरान कई संदिग्ध दस्तावेज, मोबाइल चैट, बैंक डिटेल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बरामद किए गए।
एसडीएम ने बताया कि “कॉफी विद एसडीएम” कार्यक्रम में लगातार शिकायत मिल रही थी कि कुछ फर्जी सीएससी और प्रज्ञा केंद्रों के माध्यम से अवैध तरीके से सरकारी दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं। शिकायतों की पुष्टि होने के बाद यह कार्रवाई की गई।
तीन सदस्यीय जांच टीम गठित
मामले की गंभीरता को देखते हुए मौके पर ही तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम बनाई गई। इसमें मेराल अंचल अधिकारी , सीएससी मैनेजर और थाना प्रभारी को शामिल किया गया।
जांच टीम ने कई घंटों तक सेंटर की तलाशी लेकर अहम साक्ष्य जुटाए। प्रारंभिक जांच में पता चला कि आवेदकों से केवल नाम और जन्मतिथि लेकर व्हाट्सऐप के जरिए जानकारी मंगाई जाती थी और फिर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार कर भेज दिया जाता था।
मोबाइल चैट और स्क्रीनशॉट से खुलासा हुआ कि एक प्रमाण पत्र बनाने के एवज में 1000 से 1400 रुपये तक वसूले जा रहे थे। टीम ने सेंटर से लैपटॉप, मोबाइल फोन, संदिग्ध चैट रिकॉर्ड, बैंक खातों की जानकारी और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं। अब इनकी तकनीकी जांच कराई जाएगी।
मेराल और पलामू कनेक्शन आया सामने
जांच में मेराल के गोंदा क्षेत्र के एक युवक का नाम सामने आया है, जो अलग-अलग इलाकों से लोगों के प्रमाण पत्र बनवाने का काम करता था। वहीं, जिले के पंजरी गांव के एक व्यक्ति की संलिप्तता भी उजागर हुई है। बताया जा रहा है कि डालटनगंज सदर अस्पताल के माध्यम से बड़ी संख्या में फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने में उसकी अहम भूमिका थी।
प्रशासनिक जांच में यह भी सामने आया कि सेंटर पर सीएससी (CSC) का मोनोग्राम लगाया गया था, जबकि रिकॉर्ड में यह अधिकृत केंद्र नहीं था। अब प्रशासन उन लोगों से भी पूछताछ करेगा जिन्होंने यहां से प्रमाण पत्र बनवाए थे।
लोगों से सतर्क रहने की अपील
एसडीएम ने लोगों से अपील की है कि जन्म, जाति, आय और निवास जैसे महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज केवल अधिकृत केंद्रों और निर्धारित सरकारी प्रक्रिया के तहत ही बनवाएं। किसी भी बिचौलिये या फर्जी केंद्र के झांसे में आने से बचें।
प्रशासन ने पूरे मामले की रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को सौंप दी है। जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
