एक शिक्षिका के भरोसे पहली से आठवीं की पढ़ाई: खूंटी के जोजोहातू स्कूल में जर्जर भवन और शिक्षकों की कमी से शिक्षा व्यवस्था बेहाल

खूंटी: झारखंड सरकार और जिला प्रशासन के गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के तमाम दावों के बीच खूंटी जिले के लांदुप पंचायत स्थित राजकीयकृत मध्य विद्यालय, जोजोहातू से बदहाली की तस्वीर सामने आई है। इस ऐतिहासिक विद्यालय में पहली से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को पढ़ाने का पूरा जिम्मा महज एक सहायक शिक्षिका पर टिका हुआ है।
एक ही कमरे में बैठ रहे 1 से 8वीं तक के बच्चे
विद्यालय में वर्तमान में केवल सहायक शिक्षिका जशोमनी सलोनी पदस्थापित हैं। अप्रैल में एक शिक्षिका के सेवानिवृत्त होने के बाद से वे अकेली ही 8 कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाने, मध्याह्न भोजन (MDM) संचालित करने और अन्य प्रशासनिक कार्यों को संभालने के लिए मजबूर हैं।
चार कमरों वाले इस स्कूल के अधिकांश कमरे बेहद जर्जर हैं। बरसात में छत से पानी टपकता है और प्लास्टर टूटकर गिरता है। दुर्घटना के डर से फिलहाल एक ही ठीक-ठाक कमरे में पहली से आठवीं तक के सभी बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाया जा रहा है, जिससे शैक्षणिक गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है।
स्वतंत्रता सेनानी सिंगराज सिंह मानकी से जुड़ा है इतिहास
जोजोहातू का यह विद्यालय ऐतिहासिक महत्व रखता है। स्वतंत्रता आंदोलन में महात्मा गांधी के सहयोगी रहे सिंगराज सिंह मानकी ने शिक्षा के प्रसार के लिए अपनी जमीन दान में दी थी। आज यह विद्यालय शिक्षकों की भारी कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है।
सेवानिवृत्त शिक्षकों और ग्रामीणों ने जताई चिंता
- प्राइवेट स्कूलों की मनमानी: सेवानिवृत्त शिक्षक पंचम साहू ने कहा कि सरकारी स्कूलों की इस बदहाली के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के लोग निजी स्कूलों की ओर रुख करने को मजबूर हैं, जिसका सबसे अधिक नुकसान जनजातीय और ग्रामीण बच्चों को हो रहा है।
- छात्रों की मांग: विद्यार्थियों ने भी पढ़ाई प्रभावित होने की बात स्वीकार करते हुए नए शिक्षकों की नियुक्ति और भवन की तत्काल मरम्मत की मांग की है।
प्रशासन का रुख
जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE) सुरेश महतो ने बताया कि उन्हें जोजोहातू विद्यालय की स्थिति और जिले के अन्य स्कूलों में शिक्षकों की कमी की जानकारी है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि जल्द ही विद्यालय में अतिरिक्त शिक्षकों की पदस्थापना की जाएगी और स्थिति में सुधार लाया जाएगा।
