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दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि: ‘आदिवासियों की एकता ही उनकी ताकत, शोषण के खिलाफ संघर्ष ही एकमात्र रास्ता’ — सीएम हेमंत सोरेन

रामगढ़ (नेमरा) | 04 अगस्त: जंगलों में रहने वाले आदिवासियों की एकता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। शोषण के खिलाफ लगातार संघर्ष और आंदोलन ही अपने अधिकार पाने का एकमात्र रास्ता है—यह रास्ता हमें दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने दिखाया था और आज भी उनके संदेश हमारा मार्गदर्शन कर रहे हैं।

यह बातें मंगलवार को रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पिता स्व. शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कही।

लुकैयाटांड़ में गुरुजी की प्रतिमा का अनावरण

इस भावुक अवसर पर नेमरा गांव से सटे लुकैयाटांड़ स्थित सोना सोबरन हाई स्कूल परिसर में दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रतिमा का भव्य अनावरण किया गया।

प्रतिमा अनावरण के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा:

“स्कूल परिसर में प्रतिमा स्थापित करने का मकसद यह है कि हमारी आने वाली पीढ़ी गुरुजी के संघर्षों और शहादतों को याद रखे। हमारा इतिहास उनके दिलों में ज़िंदा रहे, ताकि उनका भविष्य संवर सके और वे आने वाली चुनौतियों का डटकर मुकाबला कर सकें।”

‘आज सिर्फ परिवार ही नहीं, बल्कि पूरा राज्य ग़मगीन है’

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आज का दिन उनके और उनके परिवार के लिए अत्यंत पीड़ादायक है। यह सिर्फ एक परिवार का नुकसान नहीं, बल्कि देश और राज्य के तमाम दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों के लिए भी एक गहरा आघात है। गुरुजी को आज पूरे झारखंड में याद किया जा रहा है।

दादा सोबरन मांझी की शहादत को किया याद

भावुक क्षणों के बीच मुख्यमंत्री ने अपने दादा स्व. सोबरन मांझी के बलिदान को भी याद किया। उन्होंने बताया कि जिस लुकैयाटांड़ परिसर में पिता की प्रतिमा स्थापित की गई है, उसी जंगल में उनके दादा का भी समाधि स्थल है, जिनकी असामाजिक तत्वों ने बेरहमी से हत्या कर दी थी।

शोषणकर्ताओं पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि दशकों पहले शोषण करने वालों ने जो कांड किया था, आज भी वैसी घटनाएं सुनने को मिलती हैं। इससे साफ है कि “शोषण करने वालों के चेहरे बदल गए हैं, लेकिन उनकी फितरत आज भी वही है।”

नई पीढ़ी को सही राह दिखाना जरूरी

आधुनिक दौर और युवाओं का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि नया दौर नई पीढ़ी का है जो पूरी ताकत से आगे बढ़ रही है। हालांकि, इसमें अच्छाई और बुराई दोनों समाहित हैं। इसलिए नई पीढ़ी को सही रास्ता दिखाना हमारी जिम्मेदारी है ताकि उनका भविष्य उज्ज्वल हो सके।

अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा सरकारी योजनाओं का लाभ

हेमंत सोरेन ने संकल्प दोहराते हुए कहा कि जिस झारखंड राज्य की स्थापना के लिए शिबू सोरेन ने जीवन भर संघर्ष किया, उसे सजाने और संवारने की जिम्मेदारी अब हमारी है।

  • अंतिम व्यक्ति तक विकास: राज्य सरकार का प्रयास है कि योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
  • पारदर्शी व्यवस्था: जनता की आवाज बिना किसी रुकावट के सीधे सरकार तक पहुंचे, इसके लिए प्रशासनिक व्यवस्था को और दुरुस्त किया जा रहा है।

‘अपनों से नहीं, एकता तोड़ने वाले दुश्मनों से लड़ना है’

झारखंड की वीर भूमि का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य का हर कोना वीरों की गाथाओं से भरा है। हमारे पूर्वजों ने आजादी और अपने हक-अधिकारों के लिए लड़ाइयां लड़ी हैं। आज भी उन्हीं वीरों के वंशज इस माटी पर मौजूद हैं।

उन्होंने लोगों को एकजुट रहने का आह्वान करते हुए कहा कि हमारी एकता को तोड़ने और आपस में बांटने के लिए कई ताकतें सक्रिय हैं। हमें अपनों से नहीं, बल्कि इन ताकतों से लड़ना है और उन्हें कभी सफल नहीं होने देना है।

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