संघर्षशील और जुझारू शख्सियत थे ‘दिशोम गुरु’ शिबू सोरेन
रांची, 4 अगस्त । झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, राज्यसभा सांसद और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक ‘दिशोम गुरु’ शिबू सोरेन का नई दिल्ली स्थित सर गंगाराम अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। वे 81 वर्ष के थे और लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके पुत्र और झारखंड के वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को उनके निधन की जानकारी दी।
एक संघर्षशील जीवन की शुरुआत
शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में हुआ था। वे संथाल जनजाति से थे। स्कूल के दिनों में ही जब उनके पिता की हत्या साहूकारों द्वारा कर दी गई, तभी उनके भीतर सामाजिक अन्याय के खिलाफ संघर्ष की भावना ने जन्म लिया।
18 वर्ष की आयु में उन्होंने संथाल नवयुवक संघ की स्थापना की और सामाजिक-सांस्कृतिक जागरूकता के अभियान शुरू किए। वर्ष 1972 में ए.के. रॉय और बिनोद बिहारी महतो के साथ मिलकर झारखंड मुक्ति मोर्चा की नींव रखी। संगठन के महासचिव बनते हुए उन्होंने जल, जंगल और जमीन की लड़ाई को नई दिशा दी।
जमींदारी, महाजनी प्रथा और जन आंदोलन
झामुमो के शुरुआती संघर्ष आदिवासी जमीनों की वापसी और महाजनी प्रथा के खिलाफ केंद्रित रहे। शिबू सोरेन के नेतृत्व में जन अदालतें लगती थीं, साहूकारों के अत्याचारों का प्रतिकार होता था और जमींदारों के कब्जे से जमीन छुड़ाई जाती थी। 23 जनवरी 1975 को चिरुडीह कांड के बाद वह सुर्खियों में आए, जिसमें 11 लोगों की मृत्यु हुई थी। इसी मामले ने वर्षों बाद उन्हें कानूनी विवादों में भी घसीटा।
राजनीतिक सफर: लोकसभा, राज्यसभा, मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री
शिबू सोरेन ने 1980 में पहली बार लोकसभा का चुनाव जीता। वे 1980–84, 1989–98, और 2002–2019 तक कई बार दुमका लोकसभा सीट से सांसद रहे। वे तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री भी बने – 2005, 2008–2009 और 2009–2010 के बीच।
उन्होंने तीन बार केंद्रीय कोयला मंत्री के रूप में भी कार्य किया। हालांकि, शशि नाथ झा हत्याकांड और चिरुडीह कांड जैसे विवादों ने उनके राजनीतिक जीवन को कई बार झटका दिया। 2006 में दोषी ठहराए जाने के बाद आजीवन कारावास की सजा भी हुई, जिसे 2007 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया।
पारिवारिक जीवन और राजनीतिक विरासत
शिबू सोरेन की पत्नी रूपी सोरेन हैं। उनके चार बच्चे – दुर्गा, हेमंत, बसंत और अंजलि सोरेन हैं। बड़े पुत्र दुर्गा सोरेन झामुमो विधायक थे। उनकी पत्नी सीता सोरेन भी विधायक रही हैं। मंझले पुत्र हेमंत सोरेन वर्तमान में झारखंड के मुख्यमंत्री हैं।
2025 के झामुमो महाधिवेशन में उन्होंने पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी बेटे हेमंत को सौंपी और खुद संस्थापक अध्यक्ष बन गए।
एक युग का अंत
शिबू सोरेन का जाना झारखंड की राजनीति में एक युग का अंत है। वे सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के प्रतीक, उनकी आवाज और उनके संघर्ष के प्रतीक थे। उनका जीवन विवादों से अछूता नहीं रहा, लेकिन उनके संघर्ष, जमीनी जुड़ाव और नेतृत्व क्षमता ने उन्हें ‘दिशोम गुरु’ की संज्ञा दिलाई।
उनकी राजनीतिक और सामाजिक विरासत आने वाले वर्षों तक झारखंड और भारत की राजनीति में गूंजती रहेगी।
ॐ शांति।
