आदिवासी कल्याण विभाग के विद्यालयों में आउटसोर्स से नहीं होगी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्ति: मंत्री चमरा लिंडा

खूंटी, 29 जुलाई। झारखंड के आदिवासी कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने कहा है कि आदिवासी कल्याण विभाग द्वारा संचालित एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS) सहित सभी विभागीय विद्यालयों में अब चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्ति आउटसोर्सिंग के माध्यम से नहीं की जाएगी। नियुक्ति प्रक्रिया में संबंधित क्षेत्र के स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी।
यह जानकारी बुधवार को मंत्री से मुलाकात के बाद इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स एसोसिएशन, झारखंड के प्रतिनिधिमंडल ने दी।
स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने की मांग
संस्था के झारखंड प्रदेश महासचिव तपन कुमार घोष के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री को ज्ञापन सौंपकर मांग की कि विभागीय विद्यालयों में चतुर्थ श्रेणी के पदों पर स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि जिन गांवों और मौजों में विद्यालय संचालित हैं, वहां के योग्य एवं इच्छुक अभ्यर्थियों के साथ-साथ विद्यालय के लिए भूमि दान करने वाले परिवारों को भी नियुक्ति में प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
विभागीय सचिव को दिए निर्देश
ज्ञापन पर संज्ञान लेते हुए मंत्री चमरा लिंडा ने विभागीय सचिव को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि सभी जिलों के उपायुक्तों को निर्देश जारी किए जाएं कि आदिवासी कल्याण विभाग के विद्यालयों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्ति आउटसोर्सिंग के माध्यम से नहीं की जाएगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि नियुक्ति प्रक्रिया में संबंधित विद्यालय क्षेत्र के स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
प्रतिनिधिमंडल में ये लोग रहे शामिल
मंत्री से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स एसोसिएशन के झारखंड प्रदेश महासचिव तपन कुमार घोष, सचिव शंकर शंभु राजेश, कार्यालय सचिव गणेश लोहरा, अनुप कुमार वर्मा, बिरसा लोहरा, तुलसी प्रजापति सहित अन्य सदस्य मौजूद थे।
