झारखंड में कोयला-लौह अयस्क पर सेस को लेकर चंपाई सोरेन ने सरकार को घेरा, बोले- महंगे खनिज से उद्योगों को नुकसान
पूर्वी सिंहभूम, 1 सितंबर। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा नेता चंपाई सोरेन ने राज्य में कोयला और लौह अयस्क पर लगाए जा रहे सेस को लेकर हेमंत सोरेन सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड में खनिजों की कीमत पड़ोसी राज्यों की तुलना में अधिक होने से स्थानीय खनन कंपनियों और उद्योगों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। चंपाई सोरेन ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर सरकार की खनिज नीति पर सवाल खड़े किए।
पड़ोसी राज्यों से महंगा है झारखंड का कोयला
चंपाई सोरेन ने थर्मल कोयले के जी-11 ग्रेड का उदाहरण देते हुए कहा कि झारखंड में इसकी कीमत करीब 2,458 रुपये प्रति टन है। वहीं पश्चिम बंगाल में यही कीमत करीब 1,741 रुपये और ओडिशा में 1,708 रुपये प्रति टन है।
उन्होंने कहा कि करीब 700 से 750 रुपये प्रति टन का अंतर होने के कारण ग्राहक झारखंड की बजाय पश्चिम बंगाल या ओडिशा से कोयला खरीदना पसंद कर सकते हैं। इससे राज्य के स्थानीय उद्योग और खनन कारोबार प्रभावित हो सकते हैं।
अतिरिक्त टैक्स और सेस को बताया कीमत बढ़ने की वजह
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि खनिजों की कीमतों में इस अंतर की एक बड़ी वजह अतिरिक्त टैक्स और सेस है। उन्होंने कहा कि अत्यधिक सेस लगाने से वैध खनन कारोबार पर दबाव बढ़ता है और इससे अवैध खनन एवं कारोबार को बढ़ावा मिलने की आशंका रहती है।
चंपाई सोरेन के अनुसार, यदि अवैध कारोबार बढ़ता है तो इसका सीधा असर सरकार के राजस्व पर भी पड़ेगा। रॉयल्टी, जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT), राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट (NMET) और GST जैसे राजस्व स्रोतों से मिलने वाली राशि प्रभावित हो सकती है।
कांग्रेस और राज्य सरकार की नीति पर सवाल
चंपाई सोरेन ने कांग्रेस की नीतियों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस केंद्र में विपक्ष की भूमिका में है, जबकि कर्नाटक और तेलंगाना में उसकी सरकार है। उन्होंने सवाल किया कि यदि वहां ऐसी कर व्यवस्था नहीं है तो झारखंड में अतिरिक्त सेस क्यों लगाया जा रहा है।
उन्होंने केंद्र की ‘वन नेशन, वन टैक्स’ की दिशा में उठाए जा रहे कदमों का हवाला देते हुए झारखंड में अतिरिक्त सेस को अनुचित बताया।
सेस से मिले हजारों करोड़ रुपये के इस्तेमाल पर पूछा सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार से यह भी पूछा कि पिछले दो वर्षों में सेस के माध्यम से वसूले गए हजारों करोड़ रुपये का कितना हिस्सा खनन प्रभावित क्षेत्रों और प्रदूषण से जूझ रहे गांवों के विकास पर खर्च किया गया।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार नए खदानों को शुरू करने की दिशा में काम करे तो रॉयल्टी और नीलामी प्रीमियम के माध्यम से राज्य की आय बढ़ाई जा सकती है। इससे रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे और सरकार को स्थायी राजस्व प्राप्त हो सकता है।
‘कई खदानें बंद हुईं, रोजगार पर पड़ा असर’
चंपाई सोरेन ने दावा किया कि मौजूदा नीति के कारण कई खदानें बंद हुई हैं और इससे हजारों लोगों के रोजगार पर असर पड़ा है। उन्होंने सरकार को आगाह करते हुए कहा कि झारखंड को अवैध खनन और अवैध कारोबार का केंद्र बनाने की किसी भी कोशिश का विरोध किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को सड़क से लेकर सदन तक उठाया जाएगा और राज्य के हित में सरकार को अपनी खनिज नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए।
