बाबूलाल मरांडी ने गिरीडीह में आदिवासी बेटी के अपहरण पर गहरी चिंता जताई, हेमंत सरकार पर निशाना
रांची: भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने गिरीडीह जिले में एक आदिवासी लड़की के अपहरण की घटना पर गहरी चिंता जताते हुए राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मरांडी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इस मामले को लेकर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आठ दिन तक लापता रहने के बाद लड़की तो मिल गई, लेकिन अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है और न ही कोई सख्त कानूनी कार्रवाई की गई है, जो अपराधियों के खिलाफ सख्त संदेश दे सके।
बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार पर आरोप लगाया कि उनकी सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि किसी भी मामले में आरोपियों के धर्म और वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए कानून का पालन किया जाए। उनका कहना था कि इस प्रकार की राजनीति राज्य में आदिवासी समुदाय के लोगों को निशाना बनाए जाने का कारण बन रही है। उन्होंने कहा कि यह घटना झारखंड में आदिवासी बेटियों की सुरक्षा को लेकर सरकार की नाकामी को दर्शाती है।
मरांडी ने कहा, “आज आदिवासी समाज में गुस्सा है और हमारी बेटियां डर के साए में जी रही हैं। यह बेहद चिंता का विषय है कि सरकार इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रही।” उन्होंने आगे कहा, “जो सरकार आदिवासी समाज की सुरक्षा नहीं कर सकती, उसे उनका प्रतिनिधित्व करने का कोई अधिकार नहीं है।” मरांडी ने राज्य सरकार से आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करते हुए कहा कि अगर जल्द ही कार्रवाई नहीं होती, तो यह सरकार की नीयत और संवेदनशीलता पर सवाल उठेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि आदिवासी समाज को सुरक्षा और न्याय मिलना चाहिए, लेकिन हेमंत सरकार की उदासीनता ने उनके विश्वास को तोड़ा है। मरांडी ने सरकार से अपील की कि वह इस मामले में न केवल त्वरित कार्रवाई करे, बल्कि आदिवासी समाज के प्रति अपनी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता को भी साबित करे।
गिरीडीह में घटित इस अपराध ने राज्य के आदिवासी समुदाय में असुरक्षा की भावना को और भी बढ़ा दिया है। मरांडी ने बताया कि ऐसे घटनाएं केवल समाज में असंतोष और गुस्से को जन्म देती हैं, जो अंततः सरकार के प्रति विश्वास को कमजोर कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में बढ़ते अपराधों और विशेष रूप से आदिवासी बेटियों के खिलाफ बढ़ती हिंसा को देखते हुए सरकार को इस मामले को एक गंभीर मुद्दे के रूप में लेना चाहिए और ऐसे अपराधों के खिलाफ सख्त कदम उठाने चाहिए।
इस पूरे मामले ने राज्य के सुरक्षा तंत्र और सरकार की संवेदनशीलता पर सवाल खड़ा किया है, खासकर जब आदिवासी बेटियों की सुरक्षा के मुद्दे पर लगातार चिंताएं उठ रही हैं। मरांडी ने इस घटनाक्रम को लेकर राज्य सरकार से जवाबदेही तय करने की भी मांग की और इसे राज्य के लिए एक शर्मनाक स्थिति बताया।
इस प्रकार की घटनाएं आदिवासी समुदाय के बीच डर और असुरक्षा की भावना को और बढ़ाती हैं, और यह राज्य की सरकार की संवेदनशीलता और नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। मरांडी ने कहा कि यह समय है कि राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारियों को समझे और आदिवासी समाज की सुरक्षा को प्राथमिकता दे।
