पद्मश्री कवि सुरेंद्र दुबे के निधन पर कवि सम्मेलन आयोजन समिति ने व्यक्त की गहरी शोक संवेदना
रांची : देशभर में हास्य-व्यंग्य कविता के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुके पद्मश्री सम्मानित कवि डॉ. सुरेंद्र दुबे के आकस्मिक निधन पर कवि सम्मेलन आयोजन समिति के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति हेतु ईश्वर से प्रार्थना करते हुए उनके निधन को हिंदी साहित्य, विशेषकर हास्य कविता जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया।
समिति के पदाधिकारियों ने श्रद्धांजलि स्वरूप कहा कि डॉ. सुरेंद्र दुबे केवल एक प्रखर और सशक्त कवि ही नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने वाले संवेदनशील रचनाकार भी थे। उनकी कविताओं में हास्य के साथ-साथ गहरी सामाजिक चेतना का संदेश भी सहजता से समाहित रहता था। उनकी प्रस्तुति में व्यंग्य की धार थी, जो श्रोताओं के मन-मस्तिष्क को झकझोर देती थी।
ज्ञात हो कि वर्ष 2024 में डॉ. सुरेंद्र दुबे ने रांची स्थित मारवाड़ी भवन में समिति द्वारा आयोजित “हास्य कवि सम्मेलन समारोह” में विशेष आमंत्रित कवि के रूप में भाग लिया था। उस अवसर पर उन्होंने अपनी प्रसिद्ध कविता ‘संसद के गलियारों से’ सुनाकर श्रोताओं को हास्य से सराबोर कर दिया था। उनके व्यंग्यबाणों की तीव्रता और भाषा की सहजता ने रांचीवासियों के दिलों में एक अमिट छाप छोड़ी थी।
डॉ. दुबे का समग्र साहित्यिक जीवन और हास्य कविता क्षेत्र में उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बना रहेगा। उनके निधन से हिंदी कविता जगत में जो रिक्तता आई है, उसे भरना कठिन है।
शोक संवेदना व्यक्त करने वालों में प्रमुख रूप से सुरेश चंद्र अग्रवाल, ललित कुमार पोद्दार, अशोक कुमार नारसरिया, विनोद कुमार जैन, पवन शर्मा, अनिल अग्रवाल, पवन पोद्दार, किशोर मंत्री, रतन मोर, कमल जैन, मनोज बजाज, पुनीत पोद्दार, पुनीत अग्रवाल, हरि कनोडिया, संजय सर्राफ, प्रकाश ड्रोलिया, बबलू हरित और संतोष अग्रवाल शामिल हैं।
उक्त जानकारी समिति के पूर्व प्रवक्ता श्री संजय सर्राफ द्वारा दी गई।
