Jharkhand Politics: SIR विवाद पर भाजपा का कांग्रेस पर हमला, आदित्य साहू बोले- संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम कर रहा विपक्ष
रांची: झारखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन पर निर्वाचन आयोग तथा संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने का आरोप लगाया है। प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग के 26 सितंबर के संयुक्त बयान के बाद SIR को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर स्थिति स्पष्ट हो गई है।
आदित्य साहू ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को निर्वाचन आयोग और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर लगाए गए आरोपों पर देश से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने विपक्ष पर चुनावी प्रक्रिया को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप भी लगाया।
निर्वाचन आयोग के संयुक्त बयान का दिया हवाला
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने निर्वाचन आयोग की 26 सितंबर को हुई बैठक और उसके बाद जारी प्रेस नोट का हवाला दिया। निर्वाचन आयोग के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त एस.एस. संधू तथा विवेक जोशी की बैठक में SIR समेत कई मुद्दों पर निर्णय लिए गए। आयोग ने स्पष्ट किया कि 24 जून 2025 को जारी SIR आदेश सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी हुआ था।
आयोग ने यह भी कहा कि 2025 और 2026 में जारी किए गए SIR के अलग-अलग चरणों के कार्यक्रमों को भी आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी मिली थी।
कैबिनेट सचिव को लिखे पत्र पर भी स्थिति स्पष्ट
आदित्य साहू ने SIR से जुड़े विवाद में कैबिनेट सचिव को लिखे गए पत्र का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह पत्र किसी नीतिगत निर्णय या SIR से संबंधित नहीं था।
निर्वाचन आयोग ने अपने आधिकारिक स्पष्टीकरण में कहा कि कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र आयोग की नीति या IT डिवीजन से संबंधित नहीं था, बल्कि आयोग में प्रतिनियुक्त एक अधिकारी के कामकाज से जुड़ा था। आयोग ने यह भी कहा कि संबंधित अधिकारी द्वारा किए गए कार्य-विभाजन संबंधी आदेश लागू नहीं किए गए थे।
SIR पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी जिक्र
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट के 27 मई 2026 के फैसले का भी उल्लेख किया। निर्वाचन आयोग के अनुसार, 24 जून 2025 के SIR आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 के फैसले में बरकरार रखा था।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले में बिहार में SIR की वैधानिकता पर सुनवाई हुई थी। अदालत ने निर्वाचन आयोग के SIR करने के अधिकार को स्वीकार किया और प्रक्रिया को स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के संवैधानिक उद्देश्य से जोड़ा।
विपक्ष के पुराने आरोपों का भी आदित्य साहू ने किया जिक्र
आदित्य साहू ने कांग्रेस पर पहले भी EVM और निर्वाचन आयोग को लेकर सवाल उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष चुनावी पराजय के बाद संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाता रहा है।
उन्होंने राहुल गांधी की ओर से EVM, राफेल, बालाकोट एयर स्ट्राइक और तवांग से जुड़े मामलों में उठाए गए सवालों का भी उल्लेख किया और इन बयानों की आलोचना की।
मतदाता सूची में नाम जोड़ने को लेकर आयोग ने दी जानकारी
निर्वाचन आयोग ने 26 सितंबर के बयान में कहा कि SIR के दौरान जिन लोगों के नाम छूट गए हैं, वे continuous updation की प्रक्रिया के तहत संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) के समक्ष नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। आयोग ने युवा और पहली बार मतदान करने वाले पात्र नागरिकों के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश भी दिए हैं।
आयोग ने यह भी कहा कि SIR के दौरान जिन लोगों को ‘unmapped’ या ‘logical discrepancies’ के संबंध में नोटिस मिला है, उनके दस्तावेज लेने के लिए BLO उनके घर जा सकते हैं। ऐसे मामलों में सामान्य तौर पर ERO/AERO कार्यालय में सुनवाई के लिए बुलाने की जरूरत नहीं होगी।
कांग्रेस और भाजपा के दावों के बीच SIR पर सियासत तेज
SIR को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गया है। कांग्रेस जहां मतदाता सूची की प्रक्रिया में पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने की मांग कर रही है, वहीं भाजपा निर्वाचन आयोग के 26 सितंबर के बयान का हवाला देते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज कर रही है।
निर्वाचन आयोग ने अपने बयान में SIR से जुड़े निर्णयों को सर्वसम्मति से लिया गया बताया है। वहीं, राजनीतिक दलों की ओर से इस मुद्दे पर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। ऐसे में SIR को लेकर विवाद का राजनीतिक और कानूनी दोनों पक्ष सामने आ रहे हैं।
