जमशेदपुर हत्याकांड में एसपी-एसएसपी का निलंबन केवल खानापूर्ति : बाबूलाल मरांडी

दोषी पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग, राज्य की कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल
रांची। ने जमशेदपुर हत्याकांड के मामले में मुख्यमंत्री द्वारा एसपी और एसएसपी को निलंबित किए जाने की कार्रवाई को केवल खानापूर्ति बताया है। गुरुवार को रांची में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि केवल अधिकारियों को हटाना सजा नहीं है।
दोषी पुलिसकर्मियों पर एफआईआर की मांग
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि यदि पुलिस की मौजूदगी में किसी व्यक्ति की हत्या होती है, तो इसकी जिम्मेदारी पुलिस पर भी बनती है। उन्होंने दावा किया कि अब तक संबंधित पुलिसकर्मियों पर कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री वास्तव में इस मामले में गंभीर हैं, तो घटना के समय मौजूद पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई कराई जानी चाहिए।
होटल संचालकों पर कार्रवाई पर भी उठाए सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन लोगों के होटल में आरोपी खाना खाकर निकले थे, उनके खिलाफ ही प्राथमिकी दर्ज कर दी गई। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति किसी होटल या घर में भोजन करने के बाद बाहर जाकर अपराध करता है, तो उसके लिए होटल संचालक या मकान मालिक को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार पर निशाना
मरांडी ने आरोप लगाया कि झारखंड में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है और प्रदेश में कानून का राज कमजोर पड़ा है। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की सुरक्षा में तैनात एक एएसआई अजय सिंह के प्रभाव में पुलिस प्रशासन काम कर रहा है तथा पुलिस अधिकारियों के तबादलों से लेकर अवैध वसूली तक के मामलों में उनके हस्तक्षेप की चर्चा है। मरांडी ने कहा कि यदि ऐसी व्यवस्था जारी रही, तो राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूत करना संभव नहीं होगा।
नोट: एएसआई अजय सिंह को लेकर लगाए गए आरोप बाबूलाल मरांडी के बयान हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
