पूर्वी सिहंभूमि

सीएसआईआर-एनएमएल में लोयोला स्कूल के 83 विद्यार्थियों ने किया शैक्षणिक भ्रमण

वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीक और नवाचार की कार्यप्रणाली से रूबरू हुए छात्र

जमशेदपुर, 27 अगस्त 2026। सीएसआईआर–राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनएमएल), जमशेदपुर में गुरुवार को सीएसआईआर-जिज्ञासा कार्यक्रम के तहत लोयोला स्कूल, बिष्टुपुर के विद्यार्थियों के लिए एक दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को वैज्ञानिक अनुसंधान की कार्यप्रणाली से परिचित कराना, उनमें वैज्ञानिक सोच विकसित करना तथा विज्ञान एवं नवाचार के प्रति रुचि बढ़ाना था।

भ्रमण कार्यक्रम में लोयोला स्कूल के 83 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। उनके साथ तीन शिक्षक भी मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत एमटीई प्रभाग के प्रमुख एवं वरिष्ठतम मुख्य वैज्ञानिक डॉ. एस. शिवप्रसाद के संबोधन से हुई। उन्होंने विद्यार्थियों को सीएसआईआर-एनएमएल में संचालित विभिन्न शोध एवं तकनीकी गतिविधियों की जानकारी दी।

डॉ. शिवप्रसाद ने सरल भाषा में समझाया कि प्रयोगशाला में वैज्ञानिक अनुसंधान किस प्रकार आगे बढ़ता है और किस तरह शोध के परिणाम तकनीकी विकास एवं व्यावहारिक उपयोग में परिवर्तित होते हैं।

इसके बाद आईएमडीसी प्रभाग के प्रमुख एवं वैज्ञानिक-जी डॉ. के. गोपाला कृष्णा ने विद्यार्थियों को इस्पात और विभिन्न मिश्रधातुओं के गुणों तथा उनके दैनिक जीवन में उपयोग के बारे में जानकारी दी। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से बताया कि किसी विशेष कार्य के लिए सामग्री का चयन उसके गुणों को ध्यान में रखकर किया जाता है।

कार्यक्रम में जिज्ञासा कार्यक्रम के प्रमुख एवं वैज्ञानिक-ई डॉ. अनिमेष जेना ने सीएसआईआर-जिज्ञासा पहल के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों और अवसरों से अवगत कराया। साथ ही STEM क्लब सहित विद्यार्थियों के लिए संचालित विभिन्न पहलों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।

शैक्षणिक भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने क्रीप, एएसी, ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग, एनडीटी और मेल्टिंग डेमोंस्ट्रेशन जैसी प्रयोगशाला सुविधाओं का अवलोकन किया। इस दौरान विद्यार्थियों को वैज्ञानिक उपकरणों और अनुसंधान प्रक्रियाओं को करीब से समझने का अवसर मिला।

भ्रमण ने विद्यार्थियों को कक्षा में पढ़ाई जाने वाली विज्ञान की अवधारणाओं को वास्तविक प्रयोगशाला और अनुसंधान गतिविधियों से जोड़ने का अवसर प्रदान किया।

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