योग स्वस्थ, संतुलित और सार्थक जीवन जीने की समग्र जीवन पद्धति : राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर राज्यपाल ने किया सामूहिक योगाभ्यास, 253 लोगों ने लिया भाग
रांची, 21 जून: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर रविवार को राजभवन स्थित लोक भवन के बिरसा मंडप में सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम का आयोजन किया गया। झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम में लोक भवन परिवार के सदस्यों, अधिकारियों, कर्मचारियों तथा आमंत्रित स्कूली बच्चों सहित कुल 253 लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान योग के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली, मानसिक संतुलन और सकारात्मक जीवन मूल्यों को अपनाने का संदेश दिया गया।
इस अवसर पर राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि योग सम्पूर्ण विश्व को भारत की ओर से मिला एक अनुपम उपहार है। यह केवल शारीरिक व्यायाम का माध्यम नहीं, बल्कि स्वस्थ, संतुलित और सार्थक जीवन जीने की एक समग्र जीवन पद्धति है। योग शरीर, मन और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित कर व्यक्ति को आत्म-अनुशासन, सकारात्मक सोच और आंतरिक शांति की ओर अग्रसर करता है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप वर्ष 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था। यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को मिली वैश्विक मान्यता के साथ-साथ मानव कल्याण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का भी प्रतीक है।
राज्यपाल ने कहा कि आज योग विश्व बंधुत्व, स्वस्थ जीवनशैली और वैश्विक कल्याण का सशक्त माध्यम बन चुका है। दुनिया के अनेक देशों में लोग योग को अपने जीवन का हिस्सा बना रहे हैं और इसके सकारात्मक परिणामों का अनुभव कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रांची में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम में शामिल हुए थे, जबकि इस वर्ष उन्होंने कोलकाता में आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम में भाग लिया।
तनावपूर्ण जीवन में योग एक प्रभावी समाधान
राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान समय में पूरी दुनिया तनाव, अनियमित जीवनशैली और विभिन्न स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में योग एक प्रभावी, सरल और प्राकृतिक समाधान के रूप में सामने आया है।
उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान भी योग की उपयोगिता को पूरी दुनिया ने महसूस किया। योग ने लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने, मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और आत्मविश्वास बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास का आधार है योग
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों की सहभागिता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए राज्यपाल ने कहा कि विद्यार्थियों के लिए योग केवल स्वास्थ्य का साधन नहीं, बल्कि एकाग्रता, अनुशासन, आत्मविश्वास और व्यक्तित्व विकास का मजबूत आधार है।
उन्होंने कहा कि नियमित योगाभ्यास से बच्चों में धैर्य, सकारात्मक सोच और जीवन के प्रति संतुलित दृष्टिकोण विकसित होता है, जो उन्हें भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करता है।
राज्यपाल ने सभी नागरिकों से अपील की कि योग को केवल एक दिवस के आयोजन तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपनी दैनिक जीवनचर्या का अभिन्न हिस्सा बनाएं। उन्होंने कहा कि स्वस्थ व्यक्ति, स्वस्थ परिवार और स्वस्थ समाज ही विकसित भारत की मजबूत आधारशिला बन सकते हैं।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने नियमित योगाभ्यास करने तथा अपने आसपास के लोगों को भी योग के प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया।
