11 जुलाई को मनाया जाएगा विश्व जनसंख्या दिवस, संतुलित जनसंख्या से ही होगा सतत विकास
परिवार नियोजन, शिक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना समय की आवश्यकता : संजय सर्राफ
रांची। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष एवं झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि प्रत्येक वर्ष 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य बढ़ती जनसंख्या से जुड़ी चुनौतियों के प्रति लोगों को जागरूक करना तथा परिवार नियोजन, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, लैंगिक समानता और सतत विकास को बढ़ावा देना है।
संजय सर्राफ ने बताया कि वर्ष 1989 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) ने विश्व जनसंख्या दिवस मनाने की शुरुआत की थी। इसकी प्रेरणा 11 जुलाई 1987 को विश्व की जनसंख्या पांच अरब तक पहुंचने के बाद मिली। तब से यह दिवस जनसंख्या और उपलब्ध संसाधनों के बीच संतुलन बनाए रखने का संदेश देता आ रहा है।
बढ़ती आबादी से संसाधनों पर बढ़ रहा दबाव
उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ती जनसंख्या के कारण भोजन, पानी, ऊर्जा, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं पर दबाव बढ़ रहा है। इसके साथ ही पर्यावरण प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन और जैव विविधता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे में संतुलित जनसंख्या और संसाधनों के समुचित उपयोग की दिशा में ठोस प्रयास आवश्यक हैं।
संजय सर्राफ ने कहा कि भारत विश्व के सर्वाधिक जनसंख्या वाले देशों में शामिल है। ऐसे में परिवार नियोजन, छोटे परिवार की अवधारणा, महिलाओं की शिक्षा, किशोर स्वास्थ्य, पोषण और जागरूक नागरिकता को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है। शिक्षित, स्वस्थ और आर्थिक रूप से सक्षम परिवार ही विकसित राष्ट्र की नींव बन सकते हैं।
जागरूकता से ही बनेगा सुरक्षित और समृद्ध भविष्य
उन्होंने बताया कि विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर विद्यालयों, महाविद्यालयों, स्वास्थ्य संस्थानों और सामाजिक संगठनों द्वारा संगोष्ठियां, जागरूकता रैलियां, स्वास्थ्य शिविर, पोस्टर प्रतियोगिताएं और जनजागरूकता अभियान आयोजित किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को जिम्मेदार अभिभावक बनने तथा परिवार नियोजन के वैज्ञानिक उपाय अपनाने के लिए प्रेरित किया जाता है।
संजय सर्राफ ने कहा कि विश्व जनसंख्या दिवस का संदेश स्पष्ट है कि संतुलित जनसंख्या ही समृद्ध समाज और विकसित राष्ट्र की आधारशिला है। यदि शिक्षा, स्वास्थ्य, लैंगिक समानता और परिवार नियोजन को प्राथमिकता दी जाए तो आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित, स्वस्थ और समृद्ध भविष्य का निर्माण किया जा सकता है।
