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मासूम को टक्कर मारकर वाहन फरार, 108 एम्बुलेंस की देरी पर फूटा परिजनों का गुस्सा

Jamtara : गोविंदपुर-साहिबगंज मुख्य सड़क पर रविवार की सुबह एक दर्दनाक हादसा हो गया। सड़क पार कर रही 10 साल की एक मासूम बच्ची को तेज रफ्तार अज्ञात चार पहाड़ी वाहन ने जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बच्ची सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गई। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। मिली जानकारी के मुताबिक, प्रखंड क्षेत्र के कोरीडीह वन गांव निवासी सफाउल अंसारी की 10 साल की बेटी साजदा खातून रविवार सुबह करीब 10:30 बजे सड़क पार कर रही थी। इसी दौरान जामताड़ा से गिरिडीह की ओर जा रहे तेज रफ्तार चार पहाड़ी वाहन ने उसे टक्कर मार दी। हादसे के बाद चालक वाहन लेकर मौके से फरार हो गया। स्थानीय लोग कुछ समझ समझते, उससे पहले ही वाहन आंखों से ओझल हो चुका था।

प्राथमिक इलाज के बाद धनबाद रेफर

हादसे के तुरंत बाद परिजन और आसपास के लोग घायल बच्ची को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नारायणपुर पहुंचे। वहां ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर विवेक कुमार ने बच्ची का प्राथमिक उपचार किया। लेकिन हालत गंभीर होने की वजह से उसे बेहतर इलाज के लिए धनबाद रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों के मुताबिक बच्ची की स्थिति नाजुक बनी हुई है।

108 एम्बुलेंस नहीं पहुंची, परिजनों का गुस्सा फूटा

घटना के बाद सबसे ज्यादा नाराजगी इस बात को लेकर दिखी कि गंभीर रूप से घायल बच्ची के लिए समय पर 108 एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध नहीं हो सकी। परिजनों ने आरोप लगाया कि काफी इंतजार के बावजूद एम्बुलेंस नहीं पहुंची। आखिरकार मजबूरी में निजी एम्बुलेंस का इंतजाम कर बच्ची को धनबाद भेजना पड़ा। परिजनों का कहना था कि क्षेत्र का प्रतिनिधित्व राज्य के स्वास्थ्य मंत्री करते हैं, फिर भी अगर लोगों को वक्त पर एम्बुलेंस जैसी जरूरी सुविधा नहीं मिल रही है, तो यह गंभीर सवाल खड़े करता है।

सड़क जाम कर ग्रामीणों ने जताया विरोध

हादसे और एम्बुलेंस सेवा में देरी से नाराज ग्रामीणों और परिजनों ने कुछ देर के लिए सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। लोगों ने स्वास्थ्य व्यवस्था के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई। सूचना मिलते ही प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और लोगों को समझाकर जाम हटवाया। घटना के बाद अस्पताल परिसर में भी लोगों की भीड़ जुट गई। ग्रामीणों का कहना था कि इलाके की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह बदहाल हो चुकी है। हादसे के वक्त अगर समय पर एम्बुलेंस मिल जाती, तो मरीज को जल्दी बेहतर इलाज के लिए भेजा जा सकता था। इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों की स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत सामने ला दी।

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