कुड़मी को एसटी में शामिल करने के खिलाफ आदिवासियों ने निकाली आक्रोश रैली
पश्चिमी सिंहभूम, 19 सितंबर। जिला में कुड़मी-कुर्मी समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) में शामिल किए जाने की मांग के विरोध में शुक्रवार को चक्रधरपुर में आदिवासी समुदायों ने एकजुट होकर आदिवासी आक्रोश रैली निकाली। आदिवासी समन्वय समिति के नेतृत्व में निकली यह रैली पोटका स्थित आदिवासी मित्र मंडल से शुरू होकर अनुमंडल कार्यालय तक पहुंची, जहां राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया।
हजारों की संख्या में आदिवासी महिला-पुरुष पारंपरिक वेशभूषा और पारंपरिक हथियारों के साथ रैली में शामिल हुए। रैली में कुड़मी समुदाय की एसटी की मांग को नाजायज और असंवैधानिक बताया गया। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि छुआ-छूत मानने वाली कौम की मांग फर्जी है और रेल रोककर कर रहे काम असंवैधानिक… शर्म करो।
रैली के दौरान वक्ताओं ने ऐतिहासिक तथ्यों और आयोगों की रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि कुड़मी समुदाय कभी भी आदिवासी नहीं रहा। वर्ष 1872 की जनगणना से लेकर मंडल आयोग तक, उन्हें कृषक जाति या ओबीसी वर्ग के रूप में ही पहचाना गया है। उन्होंने बताया कि 1920-30 के दशक में कुड़मी समाज ने स्वयं को क्षत्रिय घोषित करने का आंदोलन चलाया था, जो आदिवासी पहचान के विपरीत है।
रैली में हो, मुंडा, संथाल, उरांव, भूमिज, बिरहोर और महली समुदायों के हजारों प्रतिनिधियों की भागीदारी रही। प्रमुख रूप से मथुरा गागराई, पंकज बांकिरा, नितिमा जोंको, मालती हेमब्रोम, लंगो माझी, संतोष मुंडा, अंजीता लागुरी समेत कई सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद थे।
रैली का समापन अनुमंडल पदाधिकारी श्रुति राज लक्ष्मी को ज्ञापन सौंपने के साथ हुआ, जिसमें केंद्र सरकार से कुड़मी समाज की एसटी की मांग को खारिज करने की मांग की गई।
