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झारखंड हाई कोर्ट ने भूमि सर्वे मामले में विभागीय सचिव से 15 जुलाई तक मांगा शपथ पत्र

रांची, 29 जून। झारखंड में चल रहे भूमि सर्वेक्षण को लेकर दायर जनहित याचिका पर सोमवार को झारखंड उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए पूछा कि जब पिछली सुनवाई में विभाग के सचिव को व्यक्तिगत रूप से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया था, तो उनकी जगह विभागीय अवर सचिव ने शपथ पत्र क्यों दाखिल किया।

मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए विभाग के सचिव को निर्देश दिया कि वे स्वयं 15 जुलाई तक शपथ पत्र दाखिल करें। अदालत ने यह भी कहा कि यदि पिछली सुनवाई के बाद इस मामले में कोई नई प्रगति हुई है, तो उसकी विस्तृत जानकारी भी शपथ पत्र में उपलब्ध कराई जाए।

खंडपीठ ने राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने को भी कहा कि झारखंड के सभी जिलों में भूमि सर्वेक्षण का कार्य कब तक पूरा हो जाएगा। अदालत ने इस संबंध में विस्तृत समय-सीमा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को निर्धारित की गई है।

इससे पहले जनहित याचिका दायर करने वाले गोकुल चंद की ओर से आज अदालत को बताया गया कि राज्य में अंतिम व्यापक भूमि सर्वे वर्ष 1932 में हुआ था। इसके बाद वर्ष 1980 से दोबारा सर्वेक्षण की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन कई दशक बीत जाने के बावजूद यह कार्य अब तक पूरा नहीं हो सका है। याचिका में कहा गया है कि अधूरे सर्वे के कारण भूमि विवादों और प्रशासनिक समस्याओं में लगातार वृद्धि हो रही है।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि झारखंड में भूमि सर्वेक्षण का कार्य जारी है। सरकार ने कहा कि लातेहार और लोहरदगा जिलों में सर्वे का काम पूरा हो चुका है, जबकि अन्य जिलों में प्रक्रिया विभिन्न चरणों में चल रही है।

हालांकि, अदालत ने सर्वे कार्य की प्रगति और निर्धारित समय-सीमा को लेकर स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर देते हुए विभागीय सचिव से विस्तृत शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है।

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