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कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पर भड़के वित्त मंत्री, JTET भाषा विवाद में रुख साफ नहीं करने पर साधा निशाना

Ranchi : राज्य के वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक राधाकृष्ण किशोर ने एक बार फिर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश पर तीखा हमला बोला है। इस बार उनका इशारा JTET भाषा विवाद और उस पर पार्टी के रुख को लेकर रही चुप्पी पर था। राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि JTET भाषा विवाद को लेकर बनी कमिटी की पहली बैठक हो चुकी है, लेकिन अब तक यह साफ नहीं है कि कांग्रेस का आधिकारिक रुख क्या है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पार्टी का स्टैंड ही तय नहीं है तो ऐसे में काम कैसे आगे बढ़ेगा। उन्होंने साफ कहा कि ऐसी स्थिति में वह और मंत्री दीपिका पांडे सिंह अपने विवेक से पार्टी का पक्ष कमिटी के सामने रख सकते हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि कमिटी के संयोजक होने के रिश्तेदार केशव महतो कमलेश से पार्टी का पक्ष जानना कोई गलत बात नहीं है, लेकिन इस पर भी स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनहित से जुड़े मुद्दों पर प्रदेश नेतृत्व चुप्पी साधे हुए है।

“कांग्रेस सिर्फ सत्ता की राजनीति नहीं करती”

राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस का संविधान पढ़ा है और पार्टी सिर्फ सत्ता की राजनीति नहीं करती, बल्कि जनसेवा उसकी प्राथमिकता है। ऐसे में महत्वपूर्ण मुद्दों पर चुप रहना समझ से परे है। उन्होंने कहा कि गठबंधन सरकार में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मुखिया हैं और उनका निर्णय अंतिम होता है, लेकिन एक राजनीतिक दल होने के नाते अपनी राय रखना जरूरी है। अपने ऊपर लग रहे “पुत्रमोह” के आरोपों पर भी वित्त मंत्री ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अगर उनका बेटा पार्टी के लिए मेहनत कर रहा है और संगठन को मजबूत कर रहा है, तो उसे सिर्फ नाम के कारण नजरअंदाज करना सही नहीं है।

कांग्रेस में टिकट और परिवारवाद पर सवाल

राधाकृष्ण किशोर ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी की संरचना पर भी सवाल उठाए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कमिटी में कई नेताओं के परिजन शामिल हैं। उन्होंने इसे “जम्बोजेट कमेटी” बताते हुए कहा कि अगर संगठन इतना मजबूत है तो 2029 में पार्टी को 32 सीटें मिलनी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि नगर निकाय चुनाव के नतीजे इस संगठनात्मक मजबूती पर सवाल खड़े करते हैं। वित्त मंत्री के इस बयान के बाद झारखंड कांग्रेस में एक बार फिर अंदरूनी खींचतान और बयानबाजी तेज होने के आसार हैं।

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