उत्तम क्षमा धर्म के संदेश से शुरू हुआ दशलक्षण महापर्व
क्रोध और अहंकार का त्याग कर क्षमाशील बनने का दिया संदेश, मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना
रांची, संवाददाता। दिगम्बर जैन आचार्य 108 श्री ज्ञेयसागर जी महाराज एवं मुनिश्री नियोग सागर जी महाराज संघ के पावन सानिध्य में दशलक्षण महापर्व के प्रथम दिन उत्तम क्षमा धर्म पर विशेष मंगल प्रवचन हुआ। इस अवसर पर मुनिश्री नियोग सागर जी महाराज ने श्रद्धालुओं को क्रोध, अहंकार एवं प्रतिशोध का त्याग कर क्षमाशील बनने का संदेश दिया।
मुनिश्री ने कहा कि संसार में अशांति, तनाव और आपसी कटुता का मुख्य कारण मनुष्य के भीतर बढ़ती क्रोध एवं प्रतिशोध की भावना है। उन्होंने कहा कि “वस्तु का स्वभाव ही धर्म है।” क्रोध आत्मा का स्वभाव नहीं, बल्कि एक विकार है। आत्मा का वास्तविक और शाश्वत गुण क्षमा, शांति एवं करुणा है। जब तक मनुष्य अपने भीतर के क्रोध को शांत नहीं करता, तब तक वह सच्चे सुख और शांति का अनुभव नहीं कर सकता।
उन्होंने कहा कि जब हम किसी पर क्रोध करते हैं या बदले की भावना रखते हैं, तो दूसरों को नुकसान पहुंचाने से पहले अपनी मानसिक शांति और पुण्य का क्षय करते हैं। जिस प्रकार किसी पर अंगारा फेंकने से पहले अपना हाथ जलता है, उसी प्रकार क्रोध का पहला नुकसान स्वयं को होता है। उत्तम क्षमा का अर्थ कमजोर होकर सहना नहीं, बल्कि सामर्थ्य होने के बावजूद प्रतिकूल परिस्थितियों में मन की समता और शांति बनाए रखना है।
मुनिश्री ने कहा कि क्रोध का सीधा संबंध अहंकार से है। जब अहंकार समाप्त होता है, तब क्षमा का मार्ग स्वतः प्रशस्त हो जाता है। दशलक्षण महापर्व का प्रथम दिवस हमें वैर-भाव और द्वेष की गांठें खोलने का संदेश देता है। यदि हृदय में सच्ची क्षमा आ जाए, तो परिवार, समाज और राष्ट्र के अनेक विवाद समाप्त हो सकते हैं। उत्तम क्षमा धर्म का सार बाहरी वचनों के साथ-साथ अंतरात्मा से क्षमाशील बनना, शांति स्थापित करना तथा अहंकार और कषायों का शमन करना है।
दोनों जैन मंदिरों में हुई विशेष पूजा
रांची स्थित दोनों जैन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना हुई। अपर बाजार जैन मंदिर के बड़े हॉल में विद्वान पंडित प्रदीप जी शास्त्री पीयूष के सानिध्य में वाद्य यंत्रों के साथ संगीतमय सामूहिक पूजन किया गया। पूजन के बाद शास्त्र वाचन एवं मंडल पूजन हुआ।
अपर बाजार मंदिर में श्री पवन कुमार एवं रोहित कुमार बाकलीवाल परिवार तथा सुनील कुमार एवं अनील जी चांदूवाल परिवार की ओर से शांतिधारा की गई। वहीं, वासुपूज्य जिनालय में श्री प्रदीप कुमार एवं प्रतीक कुमार छाबड़ा परिवार तथा श्रीमती सुचित्रा देवी, कोमल एवं सुमीत जी पाटनी परिवार की ओर से शांतिधारा संपन्न हुई।
संगीतमय पूजन में हेमंत सेठी, आकाश सेठी, संजय पाटनी एवं राकेश काशलीवाल का सहयोग रहा। मंडल पूजन प्रमोद झांझरी के सहयोग से तथा अभिषेक क्रिया संजय काशलीवाल, विनोद झांझरी, कमल पाटोदी, सुनील सेठी एवं मंत्री जितेंद्र छाबड़ा सहित अन्य श्रद्धालुओं की उपस्थिति में संपन्न हुई।
संध्या आरती के बाद पंडित प्रदीप जी शास्त्री पीयूष ने उत्तम क्षमा धर्म पर सारगर्भित प्रवचन दिया। जैन युवा जागृति की ओर से जिनवाणी पाठ प्रतियोगिता भी आयोजित की गई, जिसमें समाज के बच्चों ने जैन ग्रंथ जिनवाणी से संबंधित दोहे एवं काव्य की आकर्षक प्रस्तुति दी।
