पूर्वी सिहंभूमि

साझी विरासत और शिक्षा से ही मजबूत होगा समाज: सरयू राय

पूर्वी सिंहभूम, 18 जनवरी । जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने रविवार को आदित्यपुर, सिदगोड़ा और सोनारी में आयोजित विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेते हुए क्षत्रिय समाज की गौरवशाली विरासत, साझा सांस्कृतिक चेतना और शिक्षा के महत्व पर विस्तार से अपने विचार रखे।

विधायक सरयू राय ने इन तीनों कार्यक्रमों के माध्यम से सामाजिक एकता, सांस्कृतिक चेतना और शिक्षा को समाज के समग्र विकास का आधार बताते हुए लोगों से साझा विरासत को सहेजने और भावी पीढ़ी के निर्माण पर गंभीरता से विचार करने का आह्वान किया।

आदित्यपुर में झारखंड क्षत्रिय संघ के तत्वावधान में आयोजित परिवार मिलन समारोह को संबोधित करते हुए सरयू राय ने कहा कि क्षत्रिय समाज का इतिहास अतुलनीय रहा है। धर्म, समाज, देश और संस्कृति की रक्षा के लिए किए गए क्षत्रियों के संघर्ष और त्याग के गौरवशाली अध्याय आज भी प्रेरणा देते हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज के लोग अपने अतीत से जुड़ते हैं और उसी के आधार पर वर्तमान व भविष्य के लिए अपनी भूमिका तय कर पाते हैं। अपनी परंपराओं, विरासत और इतिहास को स्मरण करना आत्मबल को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि चाहे भविष्य में समाज और व्यवस्था का स्वरूप कुछ भी हो, क्षत्रिय समाज की विरासत सदैव गर्व का विषय बनी रहेगी।

विधायक ने कहा कि वर्तमान समय में दिखाई देने वाले संघर्ष और प्रतिस्पर्धा की तुलना क्षत्रिय समाज के उस त्याग और पराक्रम से नहीं की जा सकती, जिसने इतिहास को दिशा दी। कई बार शासक वर्ग अपने प्रचार के साधन जुटाता है, लेकिन इतिहास में ऐसे भी उदाहरण हैं, जहां समाज ने अपने महापुरुषों के योगदान को स्वयं सहेजकर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया है।

इसके बाद सिदगोड़ा टाउन हॉल में चंद्रवंशी एकता मंच की ओर से आयोजित वनभोज कार्यक्रम में सरयू राय ने चंद्रवंशी समाज की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि चंद्रवंशी समाज महाराज जरासंध को अपना प्रतीक पुरुष मानता है। जरासंध की वीरता और व्यक्तित्व प्रशंसनीय रहे हैं, लेकिन उस पूरे कालखंड को साझा विरासत के रूप में देखना आवश्यक है। उन्होंने जरासंध, कंस, श्रीकृष्ण, कुंती और भीष्म पितामह से जुड़ी ऐतिहासिक कड़ियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये सभी एक ही समय और परंपरा से जुड़े रहे हैं। अलग-अलग वंशों में विभाजन के बजाय इन्हें साझा विरासत के रूप में स्वीकार करना जरूरी है।

सरयू राय ने कहा कि साझा विरासत को मजबूत किए बिना सनातन संस्कृति की रक्षा संभव नहीं है। यदि सनातन संस्कृति कमजोर हुई, तो हमारे महापुरुषों और उनके आदर्शों को भी भुला दिया जाएगा।

सोनारी स्थित ट्राइबल कल्चर सेंटर में आयोजित कानू समाज के वनभोज कार्यक्रम में विधायक सरयू राय ने शिक्षा को भविष्य की सबसे बड़ी शक्ति बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की मजबूती उसकी ऐतिहासिक चेतना, आपसी एकता और भावी पीढ़ी की शिक्षा पर निर्भर करती है।

उन्होंने कहा कि कानू विकास संघ से उनका पुराना आत्मीय रिश्ता रहा है और यह समाज इसलिए आगे बढ़ रहा है, क्योंकि यहां बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। कार्यक्रम में सम्मानित किए गए बच्चों ने 95 प्रतिशत तक अंक प्राप्त कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है, जो समाज की सही दिशा को दर्शाता है।

सरयू राय ने कहा कि उन्होंने वर्षों से देखा है कि इस समाज में बच्चों और बच्चियों का शिक्षा के प्रति लगाव लगातार बढ़ रहा है। भविष्य में वही समाज अपना अधिकार और स्थान प्राप्त करेगा, जो शिक्षित होगा। शिक्षा ही विकास का सबसे सशक्त हथियार है और जो पढ़ेगा, वही आगे बढ़ेगा।

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