दो बहनों की हत्या मामले में कथित ओझा की भूमिका की जांच की मांग, सेंगेल अभियान ने सौंपा ज्ञापन
डायन होने के संदेह में हत्या का आरोप, अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ ठोस कदम उठाने की अपील
पूर्वी सिंहभूम, 14 अक्टूबर। झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के धालभूमगढ़ थाना क्षेत्र के बाबोयदा गांव में डायन होने के संदेह में दो सगी बहनों की हत्या के मामले में आदिवासी सेंगेल अभियान ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को उपायुक्त से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल ने चोडोयगुडा गांव के एक कथित ओझा की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की। संगठन के अनुसार, बाबोयदा गांव में लक्ष्मी मारडी और दुलारी सोरेन की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी गई थी। प्रतिनिधियों ने आशंका जताई कि घटना में कथित ओझा की अप्रत्यक्ष भूमिका हो सकती है। हालांकि, इस संबंध में जांच और आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
अंधविश्वास के खिलाफ कार्रवाई की मांग
सेंगेल दिशोम परगना सोनाराम सोरेन, सेंगेल माझी परगना मांडवा के केंद्रीय अध्यक्ष कविराज मुर्मू और पोनोत परगना जूनियर मुर्मू के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि आदिवासी बहुल ग्रामीण इलाकों में डायन होने के आरोप में महिलाओं को प्रताड़ित करने, सामाजिक बहिष्कार करने और हिंसा का शिकार बनाने की घटनाएं चिंता का विषय हैं।
संगठन ने कहा कि ऐसी घटनाओं के पीछे अंधविश्वास के साथ-साथ आपसी रंजिश, ईर्ष्या-द्वेष और जमीन-जायदाद से जुड़े विवाद भी हो सकते हैं। प्रतिनिधियों ने प्रशासन से मामले की सभी पहलुओं से जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की।
सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने पर जोर
सोनाराम सोरेन ने कहा कि आदिवासी समाज को नशापान, अंधविश्वास और अन्य सामाजिक कुरीतियों से मुक्त करने के लिए व्यापक सामाजिक बदलाव की जरूरत है। उन्होंने पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था में शिक्षित और लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए प्रतिनिधियों को प्राथमिकता देने की बात भी कही।
प्रतिनिधिमंडल में बिमो मुर्मू, कुनूराम बास्के, रामेश्वर मुर्मू समेत अन्य सदस्य शामिल थे। संगठन ने प्रशासन से ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की।
